रानीगंज में मोहम्मद सलीम का भाजपा, तृणमूल और चुनाव आयोग पर तीखा हमला

बुक स्टॉल विवाद से एसआईआर तक उठाए सवाल, बोले- ‘जोर कितना दमन में है तेरे, देख लिया है, देखेंगे’



रानीगंज: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने मंगलवार को रानीगंज के गिरजापाड़ा स्थित पार्टी के जिला कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन कर केंद्र और राज्य सरकार, भाजपा तथा चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दुर्गापूजा के दौरान वामपंथी बुक स्टॉलों को लेकर विवाद, कथित वोट चोरी, एसआईआर और राजनीतिक दमन सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।



बुक स्टॉलों को लेकर भाजपा पर निशाना

मोहम्मद सलीम ने कहा कि माकपा के पास होर्डिंग और टीवी विज्ञापन के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पिछले एक महीने से पार्टी के बुक स्टॉलों का प्रचार कर रहे हैं। उनके अनुसार, इससे शारदीय पत्र-पत्रिकाओं की बिक्री में पांच से दस प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। भाजपा द्वारा बुक स्टॉल नहीं लगाने देने की कथित धमकी पर उन्होंने सवाल किया कि क्या अब भाजपा पूजा कमेटियां भी चलाएगी? उन्होंने कहा कि जनता तय करेगी कि मुख्यमंत्री कौन होगा, लेकिन मुख्यमंत्री यह तय नहीं कर सकते कि जनता कौन-सी किताब पढ़ेगी। उन्होंने इसे फासीवादी मानसिकता करार दिया।


एसआईआर और चुनाव आयोग पर सवाल

सलीम ने आरोप लगाया कि देशभर में वोट चोरी और एसआईआर के खिलाफ आंदोलन तेज हो रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब सवाल यह है कि मोदी को ज्ञानेश कुमार बचाएंगे या मोदी ज्ञानेश कुमार को बचाएंगे। उन्होंने फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में कथित जालसाजी के पीछे आरएसएस से जुड़े लोगों और निजी कंपनियों का हाथ होने का आरोप भी लगाया।


दमन के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान

सलीम ने कहा कि आंदोलनकारियों को रोकने के लिए ट्रेन, मेट्रो, बस और सड़कें बंद करने जैसी कार्रवाई पर सवाल उठने चाहिए। उन्होंने कहा, “जोर कितना दमन में है तेरे, देख लिया है, देखेंगे।” आपातकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि दमन और उत्पीड़न के खिलाफ जनता ने हमेशा जवाब दिया है।


अलीमुद्दीन स्ट्रीट के पास कार्यक्रम पर भी टिप्पणी

सीपीआईएम के राज्य मुख्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट के पास भाजपा समर्थित कार्यक्रम को लेकर भी सलीम ने टिप्पणी की। उन्होंने आरपीआई अठावले समूह का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाओं के दौरान ऐसे संगठन सामने नहीं आए। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों के साइनबोर्ड का इस्तेमाल अपने हित में किया जाता है। संवाददाता सम्मेलन में सलीम ने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर माकपा का रुख स्पष्ट करते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

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