रातोंरात गायब हुई राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा, रानीगंज में सियासी घमासान तेज

थाने में शिकायत दर्ज, विरोध में उतरे वामपंथी संगठन; बीजेपी ने आरोपों को नकारा




रानीगंज : रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित पंजाबी मोड़ पर स्थापित प्रख्यात साहित्यकार, इतिहासकार एवं समाज चिंतक राहुल सांकृत्यायन की लगभग नौ फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा रातोंरात गायब हो जाने से इलाके के वामपन्थी खेमा में तीव्र आक्रोश फैल गया है.सोमवार सुबह जैसे ही वामपंथीयों को इस घटना की जानकारी मिली, शहर में सनसनी फैल गई. घटनास्थल पर प्रतिमा का आधार और चारों ओर का ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त पाया गया, जिसके बाद वामपंथी संगठनों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है.


तीन दशक पुरानी थी प्रतिमा, हाईवे निर्माण के दौरान हुई थी शिफ्ट

जानकारी के अनुसार, वर्ष 1993 में राहुल सांकृत्यायन की जन्मशती के अवसर पर पंजाबी मोड़ पर करीब 20 फीट ऊंचे चबूतरे पर यह प्रतिमा स्थापित की गई थी.उस दौर में क्षेत्र में वामपंथी संगठनों और ट्रेड यूनियनों का गहरा प्रभाव था.बाद में, छह लेन राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण और विकास कार्यों के मद्देनजर इस प्रतिमा को सड़क के मध्य भाग से हटाकर पंजाबी मोड़ के किनारे पुनर्स्थापित किया गया था. हर साल उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर यहाँ सांस्कृतिक व राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित होते आ रहे थे.


पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत, जिला शासक को सौंपेंगे ज्ञापन

इस घटना के विरोध में पश्चिम बंगाल गणतांत्रिक लेखक-शिल्पी संघ तथा जनवादी लेखक संघ ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है. सोमवार को संगठनों की ओर से रानीगंज थाना और पंजाबी मोड़ पुलिस चौकी के प्रभारी को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई.

15 जुलाई को बड़ा कदम: लेखक संघ के नेताओं ने साफ किया है कि वे बुधवार (15 जुलाई) को इस मामले को लेकर जिला शासक (डीएम) से मुलाकात करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपेंगे.


पुलिस की भूमिका पर सवाल: जनवादी लेखक संघ के अरुण कुमार पांडे ने कहा, "पंजाबी मोड़ जैसे व्यस्त और चौबीस घंटे पुलिस की मौजूदगी वाले इलाके से 9 फीट ऊंची प्रतिमा गायब हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. उस रात ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से सख्त पूछताछ होनी चाहिए.


सियासी वार-पलटवार: वामपंथियों ने लगाया साजिश का आरोप

घटना के बाद से ही क्षेत्र में राजनीतिक पारा चढ़ गया है.वामपंथी युवा नेता संजय प्रमाणिक ने सीधे तौर पर इस घटना के पीछे भाजपा समर्थकों का हाथ होने का आरोप लगाया.वहीं वामपंथी नेता हेमंत प्रभाकर और पूर्व विधायक रनु दत्त ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन किसी एक विचारधारा के नहीं, बल्कि देश की साझी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक थे। अगर विकास कार्यों के लिए भी इसे हटाया गया था, तो प्रशासन को इसे सार्वजनिक करना चाहिए था.


 फल्गुनी चटर्जी ने कहा कि "भागो नहीं, दुनिया को बदलो" का संदेश देने वाले महान साहित्यकार की प्रतिमा को इस तरह क्षतिग्रस्त कर हटाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन महापुरुषों का यह अनादर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.


बीजेपी ने आरोपों को किया खारिज

दूसरी तरफ, वामपंथियों के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए रानीगंज मंडल भाजपा अध्यक्ष शमशेर सिंह ने कहा, "मुझ पर और भाजपा पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह आधारहीन हैं.घटना के वक्त मैं अयोध्या में था. क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग और विकास से जुड़े कई काम चल रहे हैं, जिसमें प्रशासन अपनी आवश्यकतानुसार निर्णय लेता है. वामपंथी दल अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस मामले को बेवजह तूल दे रहे हैं.


सोमवार के बाद मंगलवार शाम को भी आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पंजाबी मोड़ पर जुटकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया और एक पथसभा आयोजित की. स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मुस्तैद रहे. हालांकि पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है, हालांकि प्रशासन या राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तरफ से प्रतिमा को हटाए जाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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