रानीगंज के "मिट्टी के लाल" गोपाल आचार्य ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भरा पर्चा

बाहरी विधायकों पर साधा निशाना; कहा—रानीगंज के दर्द को सिर्फ स्थानीय व्यक्ति ही समझ सकता है



रानीगंज- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के आगामी चरणों के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन रानीगंज विधानसभा क्षेत्र से एक रोचक मोड़ सामने आया है। क्षेत्र की जानी-मानी शख्सियत और सुभाष स्वदेश भावना के चैयरमेन तथा 'रानीगंज बचाओ मंच' के सक्रिय सदस्य गोपाल आचार्य ने आज निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने दुर्गापुर एसडीओ (SDO) कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र जमा किया।



कौन हैं गोपाल आचार्य?

रानीगंज के शीतला गली, एनएसबी रोड के निवासी गोपाल आचार्य क्षेत्र की समस्याओं को लेकर हमेशा मुखर रहे हैं। उन्होंने 1990 में रानीगंज के टीडीबी (TDB) कॉलेज से स्नातक (BA) की शिक्षा पूर्ण की थी। वे लंबे समय से स्थानीय मुद्दों और रानीगंज के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।



त्रिकोणीय मुकाबले के बीच स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा

रानीगंज में इस बार भाजपा, टीएमसी और माकपा के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है। जब गोपाल आचार्य से इस त्रिकोणीय मुकाबले में उनकी भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कीअब तक रानीगंज से जितने भी लोग विधायक बने, वे या तो आसनसोल के थे या दुर्गापुर के। उनके मन में रानीगंज के प्रति वह दर्द और लगाव नहीं था जो एक स्थानीय निवासी के मन में होता है। मैं रानीगंज के लोगों की समस्याओं को दूर करने और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने के लिए चुनाव मैदान में उतरा हूँ।"



प्रमुख चुनावी मुद्दे: अवैध उत्खनन और व्यापारियों की सुरक्षा

नामांकन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए आचार्य ने स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दलों पर जमकर हमला बोला। उनके अभियान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:


नदियों का अस्तित्व: उन्होंने कहा कि बालू के अवैध उत्खनन से रानीगंज की नदियों को बर्बाद किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और शहर पर बुरा असर पड़ रहा है। राजनीतिक दल इस पर मौन हैं।

व्यापारियों की आवाज: रानीगंज एक व्यापारिक केंद्र है। आचार्य के अनुसार, व्यापारी अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरकर आंदोलन नहीं कर सकते, इसलिए वे उनकी आवाज बनकर विधानसभा तक बात पहुँचाना चाहते हैं।

स्थानीय पहचान: उन्होंने भरोसा जताया कि रानीगंज की जनता इस बार किसी 'बाहरी' के बजाय अपने बीच के व्यक्ति को चुनेगी।

गोपाल आचार्य के चुनावी मैदान में उतरने से रानीगंज सीट पर समीकरण दिलचस्प हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि बड़ी पार्टियों के चुनावी शोर के बीच रानीगंज की जनता अपने "मिट्टी के लाल" पर कितना भरोसा जताती है।

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