कोयला कारोबारियों का ऐलान: अब नहीं देंगे रंगदारी टैक्स, कोल ट्रेडर्स एसोसिएशन की बैठक में बड़ा फैसला; अब तक 17 गिरफ्तार



रानीगंज: कोयला लिफ्टिंग के दौरान डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) धारकों से कथित रंगदारी वसूली पर अंकुश लगने के बाद कोयला कारोबारियों ने राहत की सांस ली है. इसी मुद्दे पर रविवार को कोलकाता, रानीगंज, कुल्टी, बराकर और धनबाद के कोल ट्रेडर्स एसोसिएशन की दूसरी संयुक्त बैठक आयोजित की गई. बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से आए कोयला व्यापारियों ने वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और संगठन को और मजबूत बनाने के साथ रंगदारी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया.



बैठक में व्यापारियों ने कहा कि चुनाव के बाद पुलिस-प्रशासन की सक्रियता तथा कोयला सिंडिकेट के खिलाफ चल रही कार्रवाई से कोयला उद्योग धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा है. आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की संयुक्त कार्रवाई के बाद कथित रंगदारी वसूली में काफी कमी आई है, जिससे डीओ होल्डरों को राहत मिली है.



हालांकि, बैठक में यह भी दावा किया गया कि भनोड़ा और नरसुमदा कोलियरी क्षेत्रों में अभी भी क्रमशः 500 से 600 रुपये प्रति टन की दर से कथित रंगदारी टैक्स मांगा जा रहा है. इस पर व्यापारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि अब किसी भी कोलियरी क्षेत्र में रंगदारी टैक्स नहीं दिया जाएगा और यदि कहीं ऐसी मांग होती है तो उसका सामूहिक रूप से विरोध किया जाएगा.



व्यापारियों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कोयला लिफ्टिंग के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की जाती थी. उनके अनुसार, शुरुआत में प्रति टन 150 से 200 रुपये वसूले जाते थे, जो बाद में बढ़कर 1,500 से 2,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गए. उनका दावा है कि ई-ऑक्शन के माध्यम से वैध तरीके से कोयला खरीदने के बावजूद ट्रकों को सुरक्षित निकालने के लिए कथित तौर पर "गुंडा टैक्स" देना पड़ता था. कई मामलों में प्रति ट्रक एक लाख रुपये से अधिक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता था. व्यापारियों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण यह अवैध वसूली लंबे समय तक जारी रही.


व्यापारियों ने बताया कि लगातार बढ़ती समस्याओं के बाद 8 मई को कोल ट्रेडर्स एसोसिएशन का गठन किया गया और आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट में सामूहिक शिकायत दर्ज कराई गई. इसके बाद पुलिस और ईडी ने संयुक्त अभियान चलाया. संगठन के अनुसार, जबरन रंगदारी वसूली के आरोप में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.


बैठक में यह भी बताया गया कि एसोसिएशन को सरकारी पंजीकरण मिल चुका है. संगठन का अलग बैंक खाता और पैन कार्ड भी जारी हो गया है. वर्तमान में 150 से अधिक कोयला व्यापारी इससे जुड़े हैं. आदित्य उर्फ संतोष सिंह को संगठन का कार्यकारी अध्यक्ष और पीयूष चौधरी को कार्यकारी सचिव बनाया गया है,जबकि सतीश अग्रवाल उपाध्यक्ष ,कोषाध्यक्ष संजय तोदी जबकि प्रकाश बोहरा कोऑर्डिनेटर बनाये गए,प्रकाश बोहरा ने बताया कि संस्था का एक संविधान बनाये बनाये जायेगे,जल्दी ही कमिटी का निर्वाचन कर नई कमिटी गठित की जाएगी.


व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अब वे पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित माहौल में कारोबार कर पा रहे हैं. उनका विश्वास है कि यदि इसी तरह सख्ती जारी रही तो कोयला व्यापार पूरी तरह सामान्य हो जाएगा और उद्योग जगत में विश्वास का माहौल और मजबूत होगा.

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