रानीगंज में 108वीं आविर्भाव जयंती पर पूजा-अर्चना, नाम संकीर्तन व सांस्कृतिक कार्यक्रम
रानीगंज- श्री श्री ओंकारनाथ संस्कृति संघ एवं सनातन संघम, रानीगंज की ओर से रविवार को श्री श्री सीतारामजी भवन में श्रीमद् भुमानंद देव की 108वीं आविर्भाव जयंती श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनायी गयी.इस अवसर पर नाम संकीर्तन, पूजा-अर्चना, आरती, पुष्पांजलि, गुरु प्रसंग और प्रसाद वितरण सहित विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये. साथ ही दीक्षा समारोह भी हुआ.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किंकर समानंदजी महाराज ने श्रीमद् भुमानंद देव के जीवन और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला.उन्होंने कहा कि उनका जीवन सादगी, शिक्षा और सद्भाव का अद्भुत उदाहरण था. अंग्रेजी के प्रोफेसर होने के बावजूद उन्होंने कभी अंग्रेजी जीवनशैली अथवा अंग्रेजियत को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. गले में तुलसी की माला, धोती और चादर उनकी पहचान थी.इसी सादगी के साथ वे विश्वविद्यालय में अध्यापन करते थे.
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भुमानंद देव से छात्र विश्वविद्यालय परिसर ही नहीं, बल्कि रेलवे प्लेटफार्म पर भी सहज होकर विषय से संबंधित जानकारी लेते थे. साधारण साधनों के साथ विश्वविद्यालय आना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. उन्होंने अपना जीवन सद्भाव और मानवता के लिए समर्पित कर दिया.
किंकर समानंदजी ने कहा कि उनके जीवन से केवल प्रभावित होने के बजाय उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की जरूरत है.कार्यक्रम में वासुदेव मंडल चट्टोपाध्याय, प्रो. दीनानाथ घटक, प्रो. सुमनजॉय दत्ता सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे. ओंकारनाथ संस्कृति संघ की ओर से ‘दास्य माधुर’ नाटक भी प्रस्तुत किया गया.आयोजन में सनातन संघम के अध्यक्ष रवींद्र भालोटिया, सचिव समेत संस्था के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही.


0 टिप्पणियाँ