रानीगंज : शहर के कई इलाकों में वर्षों पुराने और जर्जर मकान अब लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं.कई मकानों की उम्र 80 से 100 वर्ष, जबकि कुछ की उम्र करीब डेढ़ सौ वर्ष तक बतायी जाती है. दीवारों और छज्जों की हालत खराब होने के कारण इन मकानों के कभी भी ढहने की आशंका बनी हुई है. आसनसोल नगर निगम की ओर से कुछ मकान मालिकों को नोटिस भी दिया गया है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से आसपास रहने वाले लोग भय के माहौल में हैं.
हाल ही में तिलक रोड इलाके में केडिया परिवार एक पुराना मकान गिर गया था. संयोग से हादसे में किसी की जान नहीं गयी,हालांकि, इसी इलाके में कुछ वर्ष पहले जर्जर मकान का छज्जा गिरने से साइकिल से गुजर रहे एक युवक की मौत हो गयी थी.इस घटना के बाद भी शहर में पुराने मकानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
तिलक रोड के गनेड़ीवाल परिवार,बजाज परिवार और एनएसबी रोड में मोदी परिवार,सुभाष स्टेचू प्रतिमा के समीप एक बिल्डिंग, डालपट्टी ,पीएन मालिया रोड स्तिथ एक बिल्डिंग सहित इलाके में कई पुराने और जर्जर मकानों की स्थिति काफी जर्जर है,कई मकानों के नीचे दुकानें संचालित हो रही हैं. इन मकानों की हालत देखकर कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.मकान गिरने की स्थिति में दुकानदारों के साथ ग्राहकों और राहगीरों की जान भी खतरे में पड़ सकती है.
मानवीय पहलू के साथ सुरक्षा भी जरूरी : अग्निमित्रा
नारायणकुड़ी में फुटबॉल टूर्नामेंट में पहुंचीं नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने पुराने मकानों को लेकर कहा कि कई मकानों को नोटिस दिया जा चुका है,हालांकि, यदि किसी मकान में लोग रह रहे हैं, तो उसे अचानक तोड़ना आसान नहीं है. सरकार को मानवीय पहलू पर भी विचार करना होगा. साथ ही उन्होंने जर्जर मकानों से संभावित खतरे को लेकर सतर्क रहने की बात कही.
शहरवासियों का कहना है कि मानवीय पहलू जरूरी है, लेकिन लोगों की जान की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. ऐसे में नोटिस दिये गये खतरनाक मकानों का तकनीकी निरीक्षण कर जल्द उचित कार्रवाई करने की मांग उठ रही है.



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