अंधेरे में शौचालय, टूटा पैन, जर्जर पाइप और लेडीज कंपार्टमेंट में मिले पुरुषों के अंडरगारमेंट्स; देखरेख करने वाली संस्था और नगर निगम की व्यवस्था पर उठे सवाल
रानीगंज : रानीगंज के पंजाबी मोड़ स्थित ओवरब्रिज के समीप नगर निगम द्वारा संचालित सुलभ शौचालय इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है. आम लोगों, राहगीरों और विशेषकर महिलाओं की सुविधा के लिए बनाये गये इस शौचालय की हालत ऐसी है कि यहां बुनियादी सुविधाएं भी सवालों के घेरे में हैं. रविवार को रानीगंज बीजेपी कोर कमेटी के सदस्य व बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष मोनू वर्मा ने सुलभ शौचालय का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान सामने आयी अव्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने नगर निगम प्रशासन और शौचालय की देखरेख करने वाली संस्था पर गंभीर सवाल उठाये.
शौचालय में एक भी बल्ब नहीं, रात में सुरक्षा पर सवाल
निरीक्षण के दौरान शौचालय के अंदर एक भी बल्ब या लाइट नहीं मिली.ऐसे में रात के समय यहां आने वाले राहगीरों और महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. अंधेरे में शौचालय का इस्तेमाल करना सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है. मोनू वर्मा ने कहा कि सार्वजनिक शौचालय जैसी जरूरी सुविधा में प्रकाश की व्यवस्था नहीं होना जिम्मेदार एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है.
नल में पानी, लेकिन सफाई व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी
शौचालय में नल से पानी तो आ रहा है, लेकिन साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब बतायी गयी.शौचालय का एक पैन टूटा हुआ है. वहीं मुख्य टैंक से जुड़े पाइप लंबे समय से जर्जर अवस्था में पड़े हैं. मोनू वर्मा के अनुसार, इन पाइपों की स्थिति करीब तीन वर्षों से खराब है. पाइपों पर काई जम गयी है और उनसे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है.
लेडीज कंपार्टमेंट में मिले पुरुषों के अंडरगारमेंट्स
औचक निरीक्षण के दौरान लेडीज कंपार्टमेंट के अंदर पुरुषों के अंडरगारमेंट्स मिलने से मामला और गंभीर हो गया. इससे शौचालय की साफ-सफाई, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं. महिलाओं के लिए बनाये गये हिस्से में इस तरह की स्थिति को बीजेपी युवा मोर्चा ने गंभीर लापरवाही बताया.
बाहर पहचान बोर्ड तक नहीं
शौचालय के बाहर पहचान के लिए कोई बोर्ड या नेमप्लेट भी नहीं लगी मिली. इस संबंध में वहां मौजूद कर्मियों से पूछे जाने पर बताया गया कि दो दिन पहले आयी आंधी-बारिश में बोर्ड गिर गया था और उसे उठाकर अंदर रख दिया गया है. हालांकि, इसके बाद भी बोर्ड को दोबारा लगाने की दिशा में कोई पहल नहीं किये जाने पर सवाल उठ रहे है.
‘ममता सोशल सर्विस’ के पास है देखरेख की जिम्मेदारी
इस सुलभ शौचालय की देखरेख की जिम्मेदारी ‘ममता सोशल सर्विस’ नामक संस्था के पास है. मोनू वर्मा ने बताया कि उन्होंने स्थिति से अवगत कराने के लिए संस्था के मैनेजर से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
‘शुल्क लेने के बाद जनता को सुविधा क्यों नहीं?’
मोनू वर्मा ने नगर निगम प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि जब नगर निगम जनता से विभिन्न प्रकार के टैक्स वसूलता है, यहां आने वाले से भी शुल्क लिया जाता है तो आम लोगों और विशेषकर महिलाओं को बुनियादी सुविधा के लिए इस तरह की परेशानी क्यों झेलनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति बदहाल होती जा रही है, जबकि इसकी देखरेख की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था और संबंधित अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं.
अब सवाल यह है कि नगर निगम प्रशासन और संबंधित एजेंसी इस बदहाल सुलभ शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं.पंजाबी मोड़ जहां हजारों की संख्या में रोज वाहनों का आवागमन होती है,हजारों राहगीरों का आवागमन होती है,ऐसे व्यस्त इलाके में स्थित इस सार्वजनिक सुविधा की बदहाली राहगीरों के लिए आखिर परेशानी का कारण क्यो बनी हुई है.




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