जमुरिया, बीजपुर इलाके में डीवाईएफआई जामुड़िया वेस्ट लोकल कमेटी की ओर से बिजपुर में रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से भाईचारे, सामाजिक एकता और मानवीय संबंधों को मजबूत करने का संदेश दिया गया तथा समाज को धर्म और समुदाय के आधार पर बांटने की राजनीति के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीवाईएफआई I जामुड़िया के सचिव अनुरव मुखर्जी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित त्योहार नहीं है। इसका ऐतिहासिक और सामाजिक संदेश आपसी प्रेम, विश्वास, सम्मान और एकता से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान रवीन्द्रनाथ टैगोर ने रक्षाबंधन को हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में सामने रखा था। उस समय राखी के माध्यम से लोगों के बीच यह संदेश देने का प्रयास किया गया था कि धर्म और समुदाय के नाम पर समाज को विभाजित नहीं किया जा सकता।
अनुरव मुखर्जी ने कहा, “आज जब समाज में धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है, तब रवीन्द्रनाथ टैगोर के उस संदेश को याद करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। राखी सिर्फ एक धागा नहीं है; यह प्यार, भरोसे, जिम्मेदारी, सम्मान और मानवीय जुड़ाव का प्रतीक है।”
उन्होंने आगे कहा कि रिश्ते केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं होते। आपसी सम्मान, सहानुभूति और विश्वास से भी समाज में मजबूत रिश्ते बनते हैं। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए डीवाईएफआई की पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, ताकि लोगों के बीच भाईचारे और एकजुटता का संदेश मजबूत हो।
कार्यक्रम में महेंद्र गोप, भूषण कोले, मुकर्रम अंसारी, मंथन बावरी, प्रशांत बाउरी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को राखी बांधकर आपसी सौहार्द, भाईचारे और एकता का संदेश दिया।
डीवाईएफआई की ओर से कहा गया कि समाज को बांटने वाली राजनीति के खिलाफ युवाओं और आम लोगों की एकजुटता ही सबसे मजबूत जवाब है। प्रेम, भाईचारा और मानवीय एकता की भावना को मजबूत करने के लिए इस तरह के सामाजिक कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे।



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