रानीगंज : बीती रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद रानीगंज के हुसैन नगर (वार्ड नंबर 88) में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गये थे. इस दौरान गरीब और बेसहारा लोगों की परेशानी को लेकर प्रभात खबर में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद खुली. करीब छह वर्षों से बंद पड़े लाखों रुपये की लागत से बने हुसैन नगर शेल्टर होम (रैन बसेरा) का ताला शुक्रवार को खोल दिया गया. इसके साथ ही आसनसोल नगर निगम के सफाईकर्मियों ने शेल्टर होम के अंदर साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया.
हैरानी की बात यह रही कि छह वर्षों तक बंद रहने के बावजूद शेल्टर होम के अंदर रखे स्टील के बेड, गद्दे, तकिए सहित अन्य जरूरी सामान अब भी सुरक्षित मिले. इससे यह सवाल खड़ा हो गया कि लाखों रुपये खर्च कर तैयार किये गये इस रैन बसेरे का निर्माण आखिर किस उद्देश्य से किया गया था, जब जरूरत के समय इसे लोगों के लिए खोला ही नहीं गया.
व्यवस्था देखकर भाजपा नेता हुए हैरान
शेल्टर होम का ताला खुलने की खबर मिलने के बाद रानीगंज भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष मोनू वर्मा भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने अंदर जाकर शेल्टर होम की व्यवस्था का जायजा लिया. वहां मौजूद सुविधाओं गद्दा,तकिया,बेड को देखकर उन्होंने नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि जब बारिश और बाढ़ जैसे हालात में गरीब व बेसहारा लोगों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर होना पड़ता है, तब ऐसी सरकारी सुविधा का वर्षों तक बंद रहना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है.
मोनू वर्मा ने कहा, "यह बेहद शर्मनाक और प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है.गरीबों के लिए लाखों रुपये खर्च कर इतनी अच्छी व्यवस्था तैयार की गयी, लेकिन पिछले छह वर्षों से इसे ताले में बंद रखा गया. जब गरीब और बेघर लोग बारिश में भीग रहे थे, ठंड में ठिठुर रहे थे तब यह भवन केवल शोपीस बना रहा.
उन्होंने कहा कि शेल्टर होम को तत्काल पूरी क्षमता के साथ जरूरतमंदों के लिए चालू किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने लंबे समय तक इसे बंद रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
फिलहाल प्रभात खबर में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया है और साफ-सफाई शुरू कर दी गयी है.अब देखने वाली बात होगी कि यह रैन बसेरा नियमित रूप से जरूरतमंदों के लिए खुला रहता है या फिर साफ-सफाई के बाद एक बार फिर ताले में बंद हो जाता है. सवाल यह भी है कि छह वर्षों तक लाखों रुपये की इस सरकारी संपत्ति को उपयोग से बाहर रखने के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?




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