हावड़ा में ‘जीरो टॉलरेंस’: राजनीतिक नियुक्तियों वाले कामचोरों को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की आखिरी चेतावनी

"8 घंटे तो दूर, 8 मिनट भी काम नहीं करते"; मुख्यमंत्री ने हावड़ा नगर निगम के 500 कर्मचारियों को सीधे मंच से लताड़ा सर वाला



हावड़ा: “आठ घंटे तो दूर की बात है, आप लोग आठ मिनट भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते। अपना नजरिया बदलिए।” गुरुवार को हावड़ा के नए कलेक्ट्रेट भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक के मंच से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नगर निगम के पांच सौ कर्मचारियों को सीधे तौर पर यह कड़ी चेतावनी दी। सत्ता में आने के बाद से ही मुख्यमंत्री अपनी सरकार के ‘काम की सरकार’ वाले नारे को धरातल पर उतारने में जुटे हैं। हावड़ा जैसे बड़े औद्योगिक शहर में खड़े होकर दी गई उनकी यह चेतावनी सिर्फ निगम कर्मियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए एक स्पष्ट संदेश है।



500 कर्मचारी सिर्फ राजनीतिक रसूख से आए, काम शून्य: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने हावड़ा नगर निगम (HMC) के कमिश्नर से मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि निगम में कुल 1700 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 500 कर्मचारियों की नियुक्ति पूरी तरह से राजनीतिक सिफारिशों (कंसीडरेशन) के आधार पर हुई है। आरोप है कि ये कर्मचारी व्यावहारिक रूप से कभी दफ्तर ही नहीं आते। नतीजा यह हुआ कि पिछले एक दशक से अधिक समय से शहर की नागरिक सेवाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। शुद्ध पेयजल का संकट, बदहाल जल निकासी (ड्रेनेज), कचरा प्रबंधन की कमी, बदहाल स्वास्थ्य केंद्र और शैक्षणिक संस्थान—इन सबने मिलकर हावड़ा के नागरिकों का दैनिक जीवन दुभर कर दिया है।



रेल और राज्य के बीच खत्म होगी तल्खी

शुभेंदु अधिकारी के संबोधन में रेलवे और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का मुद्दा भी उठा। उन्होंने कहा:

"पिछली सरकार के कार्यकाल में रेलवे के साथ हावड़ा नगर निगम के संबंध दुश्मनी और टकराव वाले थे। इसी वजह से हावड़ा स्टेशन परिसर के विकास से लेकर जल निकासी की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अटकी पड़ी थीं। लेकिन अब यह तस्वीर बदलेगी, हम सभी पक्षों को एक छत के नीचे लेकर आए हैं।"


प्रशासनिक बैठक में जुटे शीर्ष अधिकारी, 'साफ पानी' पहली प्राथमिकता

इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला मजिस्ट्रेट (DM), पुलिस कमिश्नर (CP), राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), चार स्थानीय विधायक, हावड़ा नगर निगम, बाली नगर पालिका, केएमडीए (KMDA), एचआईटी (HIT) के अधिकारियों के साथ-साथ पूर्व रेलवे और दक्षिण-पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक (GM) और डीआरएम (DRM) सहित रेलवे के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता ‘साफ पानी, साफ पानी, साफ पानी’ सुनिश्चित करना है। इसके ठीक बाद साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट), पार्कों का सौंदर्यीकरण, स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों के बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।


गति देने के लिए बनेगी 'को-ऑर्डिनेशन कमेटी'

तमाम विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए एक विशेष समन्वय समिति (को-ऑर्डिनेशन कमेटी) का गठन किया जा रहा है, जिसका नेतृत्व जिला मजिस्ट्रेट (DM) करेंगे। नगर विकास सचिव (अर्बन डेवलपमेंट सेक्रेटरी) इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इस योजना के तहत रेलवे को क्या करना है और राज्य सरकार की क्या भूमिका होगी—इसकी अलग-अलग सूची (लिस्ट) भी फाइनल कर दी गई है।


राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन

जानकारों के मुताबिक, मुख्यमंत्री का यह कदम दोतरफा रणनीति का हिस्सा है:

पहला: लंबे समय से बदहाल पड़े हावड़ा शहर की सूरत बदलना।

दूसरा: प्रशासन की रग-रग में समा चुकी राजनीतिक नियुक्तियों और कामचोरी की संस्कृति पर लगाम लगाना।

‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति की घोषणा कर शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ, तो कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तय है। उत्तर बंगाल और दुर्गापुर के बाद अब हावड़ा; जिलों में ताबड़तोड़ प्रशासनिक बैठकें करके मुख्यमंत्री यह संदेश दे रहे हैं कि केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनता को सेवाएं देना ही उनकी सरकार का मूल मंत्र है। और इस सेवा को देने में जो भी नाकाम रहेगा, उसका कोई भी राजनीतिक रंग या रसूख काम नहीं आएगा।

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