मालदा | 15 मई, 2026 - भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रगति देखी गई है। पश्चिम बंगाल की नई सरकार के कड़े रुख और 45 दिनों की समय सीमा के भीतर बाड़ लगाने के निर्देश के बाद, मालदा जिले के हबीबपुर ब्लॉक में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। यहाँ के सीमावर्ती किसानों ने राष्ट्र सुरक्षा के महत्व को समझते हुए 'हंसते-हंसते' अपनी उपजाऊ जमीन प्रशासन के नाम कर दी।
प्रशासनिक सक्रियता और ग्रामीणों का सहयोग
शुक्रवार सुबह से ही हबीबपुर ब्लॉक के भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों ने जज़ईल क्षेत्र के भवानीपुर, भावुक, आगरा और कोटलपुर जैसे गांवों का दौरा किया। आमतौर पर भूमि अधिग्रहण के दौरान होने वाले विरोध के विपरीत, यहाँ के किसानों ने खुद आगे बढ़कर जरूरी दस्तावेजों और प्रतिज्ञा-पत्रों पर हस्ताक्षर किए।
घुसपैठ और चोरी से मिलेगी मुक्ति
किसानों के इस उत्साह के पीछे वर्षों का दर्द और असुरक्षा का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि बाड़ न होने के कारण उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ती थी.
फसल और मवेशियों की सुरक्षा: सीमा पार से आने वाले उपद्रवी अक्सर किसानों की तैयार फसल काट ले जाते थे और उनके कीमती मवेशियों की चोरी कर लेते थे.तस्करी पर लगाम: कटीले तारों के लग जाने से न केवल चोरी रुकेगी, बल्कि घुसपैठ और तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर भी पूर्ण विराम लगेगा।
मुआवजा और समय सीमा
प्रशासन ने किसानों को सरकारी नियमों के अनुसार बाजार मूल्य पर उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। हबीबपुर के भूमि सुधार अधिकारी स्वपन तरफदार ने बताया कि राज्य सरकार के फैसले के अनुसार, 45 दिनों के भीतर बीएसएफ (BSF) को जमीन सौंपने का लक्ष्य है। किसानों के इस सराहनीय सहयोग से यह कार्य अब समय सीमा के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
इस कदम से मालदा सहित पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और किसानों को एक सुरक्षित वातावरण में खेती करने का अवसर मिलेगा।

0 टिप्पणियाँ