कोलकाता | 15 मई, 2026 - पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित होने के कारण देश में ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। पेट्रोल और डीजल के महंगे होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है, जिसके चलते दैनिक उपयोग की वस्तुओं, विशेषकर दूध की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
पेट्रोल-डीजल के नए दाम
आज सुबह से प्रभावी हुई नई दरों के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतों में लगभग 3 रुपये तक की वृद्धि हुई है:
पेट्रोल: 106.03 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अब 109.32 रुपये हो गया है।
डीजल: 92.76 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अब 95.76 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गया है।
रसोई पर बढ़ा बोझ: दूध के दाम बढ़े
ईंधन की बढ़ती कीमतों ने रसोई के बजट को बिगाड़ दिया है। परिवहन शुल्क में वृद्धि के कारण मदर डेयरी और अमूल जैसे ब्रांड्स ने पैकेज्ड दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो फल, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी भारी तेजी आ सकती है।
सरकार की अपील और बढ़ती चिंता
बढ़ते संकट को देखते हुए सरकार ने जनता से ईंधन बचाने की विशेष अपील की है। जारी संदेश में नागरिकों को सलाह दी गई है कि:
बिना अनिवार्य कार्य के निजी वाहनों (बाइक या कार) का उपयोग कम करें।
ईंधन की बर्बादी रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।
अचानक हुई इस वृद्धि से टैक्सी चालक, ट्रांसपोर्टर्स और आम आदमी गहरे संकट में हैं। व्यापारियों का कहना है कि डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी से व्यापारिक लागत बढ़ेगी, जिससे अंततः आम जनता पर ही महंगाई का बोझ पड़ेगा।

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