हावड़ा के जगदीशपुर ग्रामीण अस्पताल को केंद्र कर चल रहे फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (फेक बर्थ सर्टिफिकेट) रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अस्पताल के जाली पैड, फर्जी सील और नकली डिस्चार्ज सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर सरकारी पोर्टल से असली जन्म प्रमाण पत्र जारी कराने का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान कई दस्तावेजों में विसंगतियां (असंगति) पाई गईं।
अस्पताल के रिकॉर्ड से गायब हैं नाम, दलालों का जाल
शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि जिन बच्चों के नाम पर जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए, उनका अस्पताल के प्रसूति (मैटर्निटी) रजिस्टर में कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। इस घोटाले में स्थानीय दलाल चक्र, साइबर कैफे संचालकों और स्वास्थ्य केंद्र के कुछ अस्थायी कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आ रही है। जांच के केंद्र में फिलहाल 'सौभिक' और 'भोला' नाम के दो कर्मचारियों के नाम आ रहे हैं।
"भ्रष्टाचार की बीमारी को उखाड़ फेंकेंगे" — रुद्रनील घोष
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिवपुर के विधायक रुद्रनील घोष ने सोमवार को अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों, नर्सों, सीएमओएच (CMOH) और बीएमओएच (BMOH) के साथ एक हाई-लेवल बैठक की।

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