जहाँ एक ओर पूरे राज्य में माध्यमिक परीक्षा का उत्तीर्ण प्रतिशत (Pass Percentage) लगभग 87% रहा, वहीं बांकुरा के ओंदा ब्लॉक स्थित ऊपरडांगा हाई स्कूल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की एक दर्दनाक तस्वीर पेश कर रहा है। राज्य की शिक्षा व्यवस्था के 'चिराग तले अंधेरे' जैसी स्थिति यहाँ साफ देखी जा सकती है।
शर्मनाक परिणाम और विवशता
इस वर्ष स्कूल के 83 परीक्षार्थियों में से केवल 8 छात्र ही पास हो सके हैं। स्कूल का उच्चतम स्कोर (Highest Marks) मात्र 210 है, जो कि केवल 30 प्रतिशत है। गणित, भौतिक विज्ञान और भूगोल जैसे अनिवार्य विषयों के शिक्षक न होने के कारण छात्र परीक्षा में बुरी तरह पिछड़ गए। आज स्कूल परिसर में केवल असफल छात्रों के आंसू और उनके टूटे हुए सपनों का सन्नाटा है।
अभावों के बीच शिक्षा का संघर्ष
पुनिशोल गांव मुख्य रूप से अल्पसंख्यक बहुल और आर्थिक रूप से पिछड़ा इलाका है। यहाँ के अधिकांश अभिभावक फेरीवाले या दिहाड़ी मजदूर हैं। उनके लिए बच्चों को पढ़ाना किसी विलासिता से कम नहीं है, फिर भी एक उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में उन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजा था।
शिक्षकों का भारी अभाव: 550 छात्रों वाले इस स्कूल में केवल 4 शिक्षक आवंटित हैं।
प्रशासनिक बोझ: इन 4 में से 2 शिक्षक अक्सर 'मिड-डे मील' और सरकारी परियोजनाओं के दस्तावेजीकरण में व्यस्त रहते हैं।
बंद रहीं कक्षाएं: बाकी 2 शिक्षकों के भरोसे कक्षा 6 से 10 तक की पढ़ाई चलती है। गणित, भौतिक विज्ञान और भूगोल के शिक्षक न होने से इन विषयों की पढ़ाई कभी हुई ही नहीं।

0 टिप्पणियाँ