नंदलाल जालान फाउंडेशन, 'साहस' और महावीर सेवा सदन के संयुक्त प्रयास से शिविर का सफल समापन
- कुल लाभार्थी: 130 दिव्यांगजन
- प्रदत्त उपकरण: कृत्रिम हाथ, पैर और विशेष मोल्डेड जूते
- अवधि: 7 जनवरी से 11 जनवरी तक
- आयोजक: नंदलाल जालान फाउंडेशन,रानीगंज
रानीगंज- रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स भवन परिसर में पिछले सात दिनों से चल रहे विशेष कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर का रविवार को भव्य समापन हुआ.नंदलाल जालान फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस शिविर को दुर्गापुर की स्वयंसेवी संस्था 'साहस' और कोलकाता के महावीर सेवा सदन का तकनीकी सहयोग प्राप्त था.समापन समारोह के अवसर पर लगभग 130 दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ, पैर और मोल्डेड शूज प्रदान किए गए, जिससे उनके जीवन की नई पारी की शुरुआत हुई.
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस समापन समारोह में मुख्य रूप से आसनसोल रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी सौमात्मानंद जी महाराज, आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, एसडीओ विश्वजीत भट्टाचार्य, एमएमआईसी दिव्येंदु भगत.इनके साथ ही मंच पर महावीर सेवा सदन के संस्थापक अध्यक्ष जे.एस. मेहता, अध्यक्ष वी.एस. चोरारिया, सचिव आर.एस. सिंघी, मेडिकल डायरेक्टर डॉ. वी.के. नेवटिया, संरक्षक वी.के. बगड़ोदिया और श्रीमती शैल अग्रवाल,साहस के चैयरमेन शम्भू नाथ जाजोदिया,मधुमिता जाजोदिया ,समाजसेवी राजेन्द्र प्रसाद खैतान ,अरुण भरतिया मौजूद रहे.
सेवा का संकल्प और सही मार्गदर्शन
समारोह को संबोधित करते हुए समाजसेवी आर.पी. खेतान ने भावुक होकर कहा, "फाउंडेशन का उद्देश्य दिव्यांग भाई-बहनों की सेवा करना था, लेकिन हमारे पास इस क्षेत्र का अनुभव नहीं था. दुर्गापुर के 'साहस' फाउंडेशन के शंभू जाजोदिया ने हमें सही मार्ग दिखाया और कोलकाता के महावीर सेवा सदन के साथ हमारा समन्वय कराया. उन्होंने आगे बताया कि महावीर सेवा सदन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में भी आर्थिक तंगी के बावजूद किसी जरूरतमंद का अंग प्रत्यारोपण नहीं रुकेगा.
मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास
'साहस' फाउंडेशन के शंभू जाजोदिया ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज 130 लोगों को उपकरण दिए गए हैं. उन्होंने कहा, "दिव्यांगों को फिर से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना ही हमारा लक्ष्य है.नंदलाल जालान फाउंडेशन और महावीर सेवा सदन के सहयोग के बिना यह पुनीत कार्य संभव नहीं था.
स्वामी सौमात्मानंद जी महाराज और चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है और ऐसे शिविरों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचती है.



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