जामुड़िया- "शिल्प बचाओ, नौकरी बचाओ, जिला बचाओ एवं बंगाल बचाओ" के नारे के साथ, सीटू द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशाल पदयात्रा रविवार को जामुड़िया में आरम्भ हुआ.इस पदयात्रा के माध्यम से सीपीआईएम और सीटू ने जिले के बदहाल उद्योगों, बढ़ती बेरोज़गारी और राज्य की अन्य समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया.
रविवार को पहले दिन की पदयात्रा
सीटू के नेतृत्व में यह पदयात्रा रविवार सुबह जामुड़िया के पुनियाटी से शुरू हुई, जो जामुड़िया बाज़ार और अखलपुर होते हुए नीमडांगा पहुँची. दोपहर के ठहराव के बाद, रैली शिवडांगा से फिर आगे बढ़ी और नीघा कोलियरी के रास्ते रोटी-बाटी मार्ग पर जाकर पहले दिन का समापन हुआ. पदयात्रा में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया और उद्योग बचाने तथा रोज़गार सुरक्षा की मांग को ज़ोरदार ढंग से उठाया.
पदयात्रा में प्रमुख रूप से महिला नेत्री मीनाक्षी मुखर्जी, सीपीआईएम पश्चिम बर्धमान जिला कमिटी के सचिव गौरांग चटर्जी, सीटू के जिला सचिव प्रवीर मंडल, बस्ती उन्नयन कमिटी के जिला सचिव संजय प्रमाणिक, और माकपा नेता तापस कवि, मनोज दत्ता, एमडी कलीमुद्दीन सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे.
सीपीआईएम का 'बंगाल बचाओ' अभियान
यह तीन दिवसीय अभियान सीपीआईएम के व्यापक 'बंगाल बचाओ' कार्यक्रम का हिस्सा है, जो 19 नवंबर को कूचबिहार से शुरू हुआ था और 17 दिसंबर को उत्तर 24 परगना के कमारहाटी में समाप्त होगा.
पश्चिम बर्धमान ज़िले में यह अभियान चार अलग-अलग स्थानों से आयोजित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बंद पड़े कारखानों के आंकड़े पेश करना, बेरोज़गारी को उजागर करना और राज्यभर में महिलाओं पर अत्याचार व 'चोरी के राज' चलने जैसे आरोपों को उठाना है.
सोमवार को पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए, सीपीआईएम की राज्य नेत्री मीनाक्षी मुखर्जी, पश्चिम बर्धमान ज़िला सचिव गौरांग चट्टोपाध्याय और सीटू नेता मनोज दत्त पनिहाटी वर्कशॉप से शुरू हुए.यह रैली जामुड़िया के 1 नंबर ब्लॉक के विभिन्न इलाकों में प्रचार-कार्यक्रम चलाते हुए आगे बढ़ी.
इसी मौके पर मीनाक्षी मुखर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में धर्म की राजनीति चरम पर है, जबकि लाल झंडा आज भी रोज़गार और रोज़ीरोटी की लड़ाई लड़ रहा है.उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि केवल लाल झंडा ही रोज़गार और आजीविका की बात करता है, और इसी वजह से वह जनता की मांगों को लेकर सड़क पर हैं.
यह पदयात्रा आने वाले दो दिनों तक जारी रहेगी और ज़िले के विभिन्न औद्योगिक व बस्ती क्षेत्रों में जनता को संगठित करने का प्रयास करेगी, जिससे यह माना जा रहा है कि यह स्थानीय राजनीति में रोज़गार और उद्योग संरक्षण के मुद्दे को और मज़बूती से स्थापित करेगी.



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