बांकुड़ा शहर की पुरानी पूजा कमिटियों में से एक, दशेरबांध सार्वजनिक दुर्गोत्सव पूजा कमिटी, इस वर्ष अपने 46वें वर्ष में एक बेहद मार्मिक और अनूठी थीम लेकर आई है। इस बार, पूजा में 'मौन योद्धा' के रूप में पिता के परिचय और उनकी भूमिका को सामने लाया गया है।
पतझड़ के आसमान, भोर के उजाले, ढोल की आवाज़ और फूलों की खुशबू के बीच जब हर कोई देवी के आगमन की प्रतीक्षा महसूस करता है, तब भी एक मौन धारा छिपी रहती है—जिसे न हम देखते हैं, न सुनते हैं, फिर भी वह हमारे चारों ओर मौजूद रहती है। दशेरबांध सार्वजनिक दुर्गोत्सव पूजा कमिटी अपने 46 साल के इतिहास के आँगन में उसी अनजान मगर परिचित कहानी को सामने ला रही है।
कौन है यह 'मौन योद्धा'?
यह 'मौन योद्धा' वह है जिसके हाथ में न कोई हथियार है, न मुँह में कोई वाणी। उनकी शक्ति उनके मौन में निहित है, और वह मौन ही शायद उनका सबसे बड़ा प्रतिरोध और सबसे बड़ा साहस है। समाज में पिता की भूमिका को दर्शाने के लिए इस थीम का चयन किया गया है।
कमिटी के अध्यक्ष देवाशीष लाहा ने बताया कि इस बार कुछ अलग थीम को सामने लाया गया है। उनका कहना है कि पिता वह भूमिका निभाते हैं जो संकट हो या समस्या, संतान को महसूस नहीं होने देते और मौन रूप में अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभा जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि पूजा का यह थीम लोगों तक एक महत्त्वपूर्ण संदेश पहुँचाएगा।
आकर्षक सजावट और स्थानीय कला को बढ़ावा
पूजा का बजट 12 लाख रुपये है। पूजा कमिटी के सदस्य सुरजीत दे ने जानकारी दी कि मूर्ति को भी आकर्षक और नया रूप दिया जा रहा है। मूर्ति का निर्माण स्थानीय मूर्तिकार द्वारा ही किया जा रहा है, जिससे स्थानीय कला को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, बेहतरीन वैद्युतिक सजावट भी लोगों को अपनी ओर खींचेगी।
पूजा का उद्घाटन चतुर्थी के दिन निश्चित हुआ है। कमिटी के सचिव देबजित लाहा समेत सौरव रजक, सौमेन मंडल और अनिरुद्ध दे जैसे अन्य सदस्यों में इस अनूठे आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

0 टिप्पणियाँ