जामुड़िया-नवंबर क्रांति के नाम से पूरे विश्व में विख्यात रूसी क्रांति की 107वीं वर्षी के मौके पर नॉर्थ सियारसोल कोलयरी में झंडा फहराने के साथ से एक सभा का आयोजन किया गया .इस आयोजन में भारत की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नोर्थ सियारसोल शाखा, भारत की नौजवान सभा नोर्थ सियारसोल शाखा और भारत की कोलियरी मजदूर सभा सीटू नोर्थ सियारसोल शाखा के सदस्यों ने भाग लिया. इस सभा में आम जनता को सचेतन किया गया कि आम जनता का असल हितेषी लाल झंडे करने वाले बामपंथी राजनीतिक पार्टियां ही है. जिस तरह ग्रेगॅरियन कैलेंडर के मुताबिक 7 नवंबर से 17 नवंबर तक जालिम जार शासन के दिलों को खौफ से दहला देने वाली संघर्ष की थी और आखिरकार रूस को जार शाशक की जुल्म से निजात दिलाकर एक समाजवादी गणतंत्र का गठन किया था ,जिसका नाम सोवियत संघ दिया गया और सोवियत संघ के गठन होने के बाद वहां के आम जनता मेहनतकशों को अपना अधिकार मिला. बेरोजगारी खत्म हो गई. विकास की ज्वार बहने लगी, सिर्फ इतना ही नहीं बालशेविक क्रांति के माध्यम से जार शाशक की व्यवस्था को खत्म किया और एक नई व्यवस्था कायम की गई. इससे पूरे विश्व आकर्षित हुआ और भारत के उसे समय के स्वाधीनता संग्रामी कामरेड लेनिन से मिलने गए थे,जिसमें रविन्द्रनाथ टैगोर भी थे, उनसे यह मशिवरा किया कि भारत से उपनिवेशी सरकार को किस तरह मुक्ति दिलाया जाए और के लोगों ने आकर्षित होकर स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया और भारत को भी स्वाधीनता मिली,वहीं रूस में जनता का राज कायम हुआ.भारत में स्वाधीनता मिलने के बाद जिस राष्ट्रीय संस्थानों का गठन हुआ जिस से राष्ट्र की विकास में अहम भूमिका निभाई, किन्तु आज की सरकार राष्ट्रीय संस्थान को सरकारी हाथों से निजीकरण कर रही है.आज रेल, तेल, भेल, कोयला, विद्युत एलआईसी, बैंक ,बीमा, प्रतिरक्षा तमाम संस्थाओं को निजीकरण की ओर ले जाने की यह सरकार कोशिश कर रही है ,और देश की संपत्तियों को कॉर्पोरेट के हाथों में सौंपने का एक घिनौना साजिश चल रही है. नीति आयोग के माध्यम से नीति बनाकर और उसी नीति को समर्थन हमारे राज्य की तृणमूल की सरकार उसको साथ दे रही है .हमें याद रखना चाहिए की 2002 में जब एनडीए की गवर्नमेंट तृणमूल पार्टी की मदद से सरकार में आई थी ,उस समय ग्रामीण विद्युत अधिनियम के तहत गांव के गरीबों को कम दामों में विद्युत मुहैय्या कराने का व्यवस्था था और अन्नदाता यानी किसानों को जिस तरह कम दामों में बिजली मुहैया कराने का व्यवस्था था. उस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया था. फिर 2004 की चुनाव में जब 61 वामपंथी एम पी इनके विधुत अधिनियम के खिलाफ आंदोलन के फलस्वरुप जीतकर आए और यूपीए वन में बाहर से समर्थन दिया और कोमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत ग्रामीण विद्युत अधिनियम को दोबारा वापस लाया और कम दामों में किसानों और गांव के मजदूरों को दोबारा बिजली मिलना संभव कराया ,आज वही बीजेपी की सरकार प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से कंज्यूमरों से अत्यधिक पैसा वसूलने के साथ-साथ बिग हॉर्स में यूनिट रेट दुगुना करने की साजिश रच रही है , ग्रामीण और किसानों को सब्सिडी मिल रहा था उसको खत्म करने का साजिश चल रहा है. ममता बनर्जी रेलवे मंत्री रहने के समय जो नीति बनाई थी उसी के माध्यम से पुनर्गठन के नाम पर रेलवे को टुकड़े-टुकड़े करके निजीकरण करने की साजिश चल रही है. इन दोनों के खिलाफ तथा इस राज्य में खाद्य मंत्री खाद्य की लूट करने के खिलाफ हमें आंदोलन करना होगा और इस दोनों सरकार की मिलीभगत को जनता के सामने उजागर करना होगा .
दोनों सरकारों को खात्मे की ओर ले जाना होगा .यह शपथ इस 107वीं नवम्बर क्रांति दिवस पर लिया गया, जिसमें कलीमुद्दीन अंसारी, उज्जवल मुखर्जी, महेंद्र गोप, अनिल यादव, मुकर्रम अंसारी, मुजीब अंसारी, चंदन रविदास, जोगिंदर हरिजन, राजु गोप ईत्यादि यह यहां पर उपस्थित थे.











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