जामुड़िया-यह कोई परीकथा नहीं है, दरअसल पश्चिम बर्दवान जिले के तिलका मांझी आदिवासी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक दीप नारायण नायक, जिन्हें स्ट्रीट मास्टर के नाम से जाना जाता है, ने ऐसा असंभव कार्य किया है. उन्होंने शिक्षा-संस्कृति-रोजगार इन तीन क्षेत्रों को मिलाकर 'फैंटास्टिक थ्री डायमेंशनल मॉडल' की खोज की, जिससे उन्होंने पुरुलिया, पश्चिम बर्दवान, बांकुड़ा सहित पिछड़े जिलों में महिलाओं की 'तीन पीढ़ियों' का एक साथ विकास सुनिश्चित किया.
स्ट्रीट मास्टर द्वारा खोजे गए 'महिलाओं के विकास के त्रि-आयामी मॉडल' के पहले स्तर में उन्होंने आदिवासी और पिछड़े समुदाय की महिलाओं, विशेषकर माताओं और दादी-नानी के बच्चों के माध्यम से साक्षर करना आरम्भ किया . वह माताएँ लड़कियों को नहीं दादा-दादी को साक्षर कर रही हैं, और साथ ही उनकी प्रगति की निगरानी के लिए आकलन कर रही हैं. इस तरह वह महिलाओं की तीन पीढ़ियों (बेटियों और दादी) को एक साथ शिक्षित कर रहे हैं.




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