आसनसोल : आसनसोल प्रवेश द्वार के नामकरण को लेकर राजनीति चरम पर है। अभी गेट का निर्माण हुआ ही नहीं है कि नाम को लेकर राजनीतिक शुरू हो गई है। 2018 में जब आसनसोल नगर निगम के मेयर जितेंद्र तिवारी थे, तो उन्होंने कालीपहाड़ी के समीप आसनसोल के प्रवेश द्वार पर एक द्वार का निर्माण करवाया था। जिसका नाम उन्होंने वेलकम आसनसोल सिटी ऑफ ब्रदर हुड रखा था। वर्तमान में आसनसोल नगर निगम के द्वारा इस प्रवेश द्वार को को तोड़कर नई प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जा रहा है। जिसमें कहा जा रहा है कि इस प्रवेश द्वार का नाम सिटी ऑफ ब्रदर हुड से बदलकर आई लव आसनसोल रखा जाएगा। हालांकि अभी तक नगर निगम के तरफ से यह आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन इसके बावजूद भी विपक्षी पार्षद इसका विरोध करना शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को विपक्षी पार्षद दल के नेता चैताली तिवारी और 28 नंबर वार्ड के पार्षद गुलाम सरवर ने नाम बदलने का विरोध किया था। इसको लेकर मेयर विधान उपाध्याय को एक पत्र भी लिखा था। इसके बाद शुक्रवार को पूर्व ममेयर सह भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने कहा कि आसनसोल के प्रवेश द्वार पर जो द्वार बनाई गई है। जिस पर सिटी आफ ब्रदरहुड लिखा गया है। यह केवल गेट नहीं है। बल्कि आसनसोल के नागरिकों की एक भावना है। आसनसोल के नागरिक एकता के साथ रहते हैं।जिसका प्रतीक है। क्योंकि आसनसोल में हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई इसके अलावा कई प्रांतों के लोग यहां रहते हैं। लेकिन फिर भी उनके बीच भाईचारा है। जिस तरह कोलकाता को सिटी ऑफ जॉय कहा जाता है। उसी तरह आसनसोल की पहचान सिटी आफ ब्रदरहुड के रूप में है। गेट तोड़ने का कोई कारण नहीं था। इस गेट को 20 लाख रुपए की लागत से बनाई गई थी। लेकिन अब नया गेट बनाया जा रहा है। गेट बनाया जाए। लेकिन जो भावनात्मक नाम लिखा गया है। उस नाम को तोड़ा नहीं जाए। क्योंकि यह तोड़ने का प्रयास आसनसोल के भाईचारा का तोड़ने का प्रयास है। वही गुलाम सरवर ने कहा कि आसनसोल में नई गेट बनाई जा रही है। नया गेट बनाया जाए। उससे उनको कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उसका जो नाम है उसे नहीं बदलना चाहिए। उसका नाम सिटी ऑफ ब्रदर हुड है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने भी उसके नाम को कई जगह लेकर यह पहचान दिया है कि आसनसोल भाईचारा का शहर है। इसे नहीं बदलना चाहिए।









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