रांनीगंज : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आसनसोल दुर्गापुर दौरे के बाद आसनसोल क्षेत्र में कई सारे विकास के कार्यों को मंजूरी मिली है इसी क्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विद्रोही कवि काजी नज़रुल इस्लाम के जन्म स्थल को दर्शनीय स्थल बनाने की पहल की है .मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला शासक एस अरुण प्रसाद और काजी नजरूल विवि के कुलपति डा. साधन चक्रवर्ती के नेतृत्व में एक प्रशासनिक टीम ने शुक्रवार को विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम के जन्मस्थान चुरुलिया का दौरा किया. शुक्रवार की सुबह यह टीम चुरुलिया गांव पहुंचे एवं गांव का निरीक्षण किया. इस दौरान जिला शासक की टीम ने कवि के परिजनों तथा ग्रामीणों से बातचीत कर मुख्य तथ्यों की जानकारी ली.
मालूम हो कि आसनसोल स्थित काजी नजरूल विश्वविद्यालय के कुलपति साधन चक्रवर्ती ने दुर्गापुर के सृजनी हॉल में हुए एक प्रशासनिक बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपील की थी कि विद्रोही कवि के जन्मस्थान को विरासत के रूप में मान्यता दें और पर्यटन विभाग के दायरे में लाएं. कुलपति के अनुरोध को सुनकर मुख्यमंत्री ने तुरंत राज्य पर्यटन विभाग के मुख्य सचिव सौमित्र मोहन को मामले को लेकर कार्रवाई करने को कहा था.
मुख्यमंत्री की प्रशासनिक बैठक के तुरंत बाद ही डा. सौमित्र मोहन ने कुलपति को संदेश भेजकर इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव मांगा. साथ ही पर्यटन सचिव ने कहा कि वह कलकत्ता से एक विशेष टीम विश्वविद्यालय भेजेंगे. इस काम के लिए. कुलपति साधन चक्रवर्ती ने कहा, “हमने चुरुलिया में नजरूल अकादमी का अधिग्रहण कर लिया है.हम चुरुलिया में काजी नजरूल के संगीत के साथ एक संगीत केंद्र स्थापित करेंगे.” यदि चुरुलिया को पर्यटन मानचित्र पर लाया जा सकता है, तो बांग्लादेश सहित विभिन्न देशों के पर्यटक और शोधकर्ता इस जन्मस्थान पर नियमित रूप से आ सकेंगे. वे उनके जैसे कवियों पर शोध और अभ्यास करने में भी सक्षम होंगे


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