एक बार फिर हुई राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था फिर हुई शर्मशार,घायल बुजर्ग के इलाज के लिए 13 घण्टो तक चक्कर काटते रहे परिवार




 दुर्गापुर-पश्चिम बंगाल की स्वास्थय व्यवस्था फिर एक बार हुई उस वक्त हुई शर्मशार ,जब एक घायल 62 वर्षीय व्यक्ति के परिजन अस्पताल में इलाज के भर्ती के लिए 13 घण्टो तक दुर्गापुर के निजी अस्पतालों के काटते रहे,अंततः जिंदगी और मौत के जंग के बीच वह हार गया. उस व्यक्ति की मौत हो गयी.एक तरफ राज्य सरकार स्वास्थ्य साथी कार्ड देकर गरीब जनता को इलाज का भरोसा दिलाती है, तो वहीं दूसरी तरफ बड़े-बड़े अस्पताल स्वास्थ्य साथी कार्ड से इलाज करने को राजी नहीं होते.इसका नजारा इस्पात नगरी दुर्गापुर में देखने को मिला.  सड़क दुर्घटना गंभीर रूप से घायल एक 62 वर्षीय व्यक्ति 13 घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया. बुजुर्ग की मौत के बाद गुस्साए लोगों ने सड़क पर शव को रखकर दुर्गापुर के जब्बारपल्ली सड़क को जामकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया. नतीजा सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई. दरअसल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 62 वर्षीय निर्मल मंडल शनिवार दोपहर अपनी घड़ी की दुकान बंद कर मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने घर जा रहे थे, इसी दौरान सामने से आ रही एक साइकिल को बचाने के चक्कर में वह गाड़ी से नियंत्रण खो बैठे और दुर्घटनाग्रस्त हो गए. स्थानीय लोगों द्वारा परिवार वालों को खबर दी गई, जिसके बाद से शुरू हुआ अस्पतालों के उनके भर्ती न करने की नाटक. निर्मल मंडल के बेटे रंजन मंडल अपने घायल पिता को लेकर दुर्गापुर के एक के बाद एक कई बेसरकारी अस्पताल गए, जहां उन्होंने राज्य सरकार के स्वास्थ्य साथी कार्ड का हवाला भी दिया, लेकिन किसी ने भी इस बुजुर्ग को भर्ती कर इलाज करने की जहमत नहीं उठाई. किसी अस्पताल ने बेड खाली ना होने का बहाना बनाया, तो किसी ने साफ कह दिया अब कुछ नहीं हो सकता. अपने लाचार पिता को इधर से लेकर उधर इलाज की आस में लगभग 13 घंटे तक लेकर रंजन भटकता रहा और आखिरकार इलाज के अभाव में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे 62 वर्षीय निर्मल मंडल ने सुबह 3:00 बजे दम तोड़ दिया. निर्मल मंडल की मौत के बाद स्थानीय लोग गुस्से से भर उठे और शव रखकर जब्बार पल्ली सड़क को जाम कर दिया. मृतक के परिवार वालो की मांग है कि जब तक सरकार की नजर इस और  नहीं जाती है तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा. खबर मिलते ही दुर्गापुर और फरीदपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया. काफी समझाने बुझाने के बाद परिजन शव को अन्तिम संस्कार के लिए ले गये.

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