रानीगंज-जिस अस्पताल में एक नई जिंदगी के आगमन और किलकारियों की गूंज सुनाई देनी चाहिए थी, वहां से उठी चीख-पुकार ने पूरे रानीगंज को झकझोर कर रख दिया है। रानीगंज के स्कूल मोड़ स्थित बीएन अग्रवाल मेमोरियल अस्पताल में प्रसव के दौरान 27 वर्षीय प्रसूता मोनिका मुर्मू (माझी) की संदिग्ध मौत के बाद इलाके में भारी तनाव, शोक और आक्रोश का माहौल है।
आदिवासी समाज और परिजनों के उग्र प्रदर्शन से रानीगंज का स्कूल मोड़ और नेशनल हाईवे-14 को जाम कर दिया गया। हर जुबान पर बस एक ही सवाल है—आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन?
क्या है पूरा मामला? खुशियों का घर मातम में कैसे बदला
मृतका मोनिका मुर्मू बर्नपुर के धनवा की रहने वाली थीं। उनका मायका जामुड़िया के धसना गांव में तथा ससुराल हीरापुर थाना क्षेत्र के धेनुआ गांव में था (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार वह जामुड़िया के विजयनगर की निवासी थीं)। मोनिका मां बनने वाली थीं और उनके घर में एक नए मेहमान के आने की तैयारियां चल रही थीं।
परिवार के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान मोनिका की नियमित जांच महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. कान्हाई लाल केसरी (डॉ. के.एल. केशरी) की देखरेख में हो रही थी। परिजनों का दावा है कि प्रसव से पहले तक की सभी चिकित्सकीय रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य थीं और मोनिका पूरी तरह स्वस्थ थीं।
अस्पताल में भर्ती: मंगलवार सुबह मोनिका को प्रसव के लिए बीएन अग्रवाल मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
ऑपरेशन और प्रसव: परिजनों के एक वर्ग के अनुसार उनका सामान्य प्रसव हुआ और उन्होंने एक स्वस्थ कन्या को जन्म दिया, जबकि कुछ रिपोर्टों में ऑपरेशन (सिजेरियन) के जरिए प्रसव कराए जाने की बात कही गई है।
अचानक बिगड़ी तबीयत: बच्ची के जन्म के कुछ ही समय बाद मोनिका की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।
रेफर करने का खेल: परिजनों का आरोप है कि जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तब अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए और आनन-फानन में उन्हें दुर्गापुर के किसी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। दुर्गापुर ले जाने के क्रम में या वहां इलाज के दौरान रास्ते में ही मोनिका की मौत हो गई।
परिजनों और आदिवासी समाज के गंभीर आरोप
मृतका के पति गणेश मुर्मू, जीजा नदिया सोरेन और अन्य परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर लापरवाही का कड़ा आरोप लगाया है।
लापरवाही और समय पर इलाज में चूक: परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि जब मोनिका अस्पताल लाई गई थीं, तब वह पूरी तरह ठीक थीं, चल-फिर रही थीं और बातचीत कर रही थीं। डॉक्टर की सलाह पर समय रहते खून (ब्लड) की व्यवस्था भी कर दी गई थी, फिर भी अस्पताल की लचर व्यवस्था और चिकित्सकीय लापरवाही के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
जल्दबाजी में पल्ला झाड़ना: परिजनों का आरोप है कि स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल ने जिम्मेदारी लेने के बजाय मरीज को तुरंत दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया, ताकि वे अपनी नाकामी छुपा सकें।
एनएच-14 और स्कूल मोड़ पर फूटा गुस्सा, सड़क जाम और आगजनी
घटना की खबर फैलते ही आदिवासी समाज के लोग, महिलाएँ, स्थानीय निवासी और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में बीएन अग्रवाल अस्पताल के सामने जमा हो गए।
सड़क अवरोध और प्रदर्शन: न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर आक्रोशित भीड़ ने स्कूल मोड़ के पास नेशनल हाईवे-14 पर टायर जलाकर सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया।
प्रशासन की मौजूदगी में वार्ता: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रानीगंज थाना की पुलिस, एसीपी विमान मिर्धा और प्रशासनिक अमला तुरंत मौके पर पहुंचा। जामुड़िया के विधायक बिजन मुखर्जी, भाजपा नेता शमशेर सिंह, रवि केसरी सहित कई गणमान्य लोग भी अस्पताल पहुंचे और शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात की। पुलिस और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच वार्ता का दौर चला।
मुआवजे पर खींचतान: प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि उन्हें कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर न्याय चाहिए। समाचार लिखे जाने तक मुआवजे की मांग को लेकर गतिरोध बना रहा और देर शाम तक हंगामा जारी रहा।
अस्पताल और डॉक्टर का पक्ष
दूसरी ओर, विवाद बढ़ने पर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. कन्हैया केसरी (डॉ. के.एल. केशरी) ने अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी कि मरीज की स्थिति को देखते हुए अस्पताल और चिकित्सकों की टीम ने अपनी तरफ से पूरी चिकित्सकीय कोशिश की और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया था। हालांकि, तमाम दावों के बीच मौत के असली कारणों से पर्दा अब एक निष्पक्ष और उच्चस्तरीय मेडिकल जांच के बाद ही उठ सकेगा।
एक गोद सूनी, एक सवाल अनुत्तरित
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों की कार्यप्रणाली, प्रसूति गृहों में आपातकालीन प्रबंधन और डॉक्टरों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक नवजात बच्ची ने अपनी माँ का आंचल हमेशा के लिए खो दिया है और पूरा परिवार न्याय की उम्मीद में शासन-प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठा है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी चिकित्सक और प्रबंधन पर क्या कार्रवाई करता है तथा पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।


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