शिशु बागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी की खूंटी पूजा संपन्न, प्राकृतिक सामग्री से बनेगा पंडाल व प्रतिमा
रानीगंज : शिशु बागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से रविवार को आगामी दुर्गापूजा के लिए खूंटी पूजा का आयोजन किया गया. इस वर्ष कमेटी की पूजा अपने 22वें वर्ष में प्रवेश कर रही है. इस बार पूजा का मुख्य आकर्षण पर्यावरण आधारित थीम ‘परमा प्रकृति’ होगी. पूजा पंडाल के निर्माण में प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जायेगा.
पूजा कमेटी से जुड़े सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष पूजा का बजट आठ लाख रुपये से कुछ अधिक रखा गया है. पंडाल में श्रद्धालुओं के लिए कई आकर्षण होंगे, जिनका अनुभव यहां पहुंचने के बाद ही किया जा सकेगा. कमेटी की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा का आयोजन किया जायेगा. नवमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए भोग की व्यवस्था रहेगी, जबकि एकादशी और द्वादशी के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे.
प्रकृति से कटाव ही बड़ी चुनौती : भवेश माझी
पूजा कमेटी के मुख्य कलाकार भवेश माझी ने बताया कि इस बार की थीम ‘हमारे चारों ओर की प्रकृति और देवी दुर्गा अलग नहीं हैं’ की सोच पर आधारित है.उन्होंने कहा कि आज मानव सभ्यता जिन बड़ी समस्याओं से जूझ रही है, उनमें प्रकृति और पृथ्वी से मनुष्य का बढ़ता अलगाव भी एक प्रमुख कारण है. इसी अलगाव के चलते मानव समाज को विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं और संकटों का सामना करना पड़ रहा है. वैज्ञानिक भी आने वाले समय में और गंभीर परिस्थितियों की चेतावनी दे रहे हैं.
उन्होंने बताया कि इसी विचार को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पंडाल और प्रतिमा का निर्माण प्राकृतिक सामग्रियों से किया जायेगा. मंडप में किसी भी प्रकार की कृत्रिम सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा. पंडाल निर्माण में भूसा, बांस, मिट्टी और पोड़ा-माटी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का प्रयोग होगा. वहीं मां दुर्गा की प्रतिमा पूरी तरह मिट्टी से तैयार की जायेगी और इसे सनातन स्वरूप दिया जायेगा.
खास बात यह है कि पंडाल का निर्माण किसी बड़ी व्यावसायिक कंपनी के बजाय बेनाली मोड़ स्थित ‘गरम’ संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा किया जायेगा. कमेटी का उद्देश्य पूजा के माध्यम से लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश देना है.
कमेटी के सदस्यों ने रानीगंजवासियों से अपील की कि वे दुर्गापूजा के दौरान शिशु बागान पहुंचकर प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार पंडाल, प्रतिमा और इसके पीछे छिपे पर्यावरण संरक्षण के संदेश को करीब से देखें.




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