रानीगंज-जल-जमीन-जंगल पर आदिवासियों के अधिकार की रक्षा की मांग को लेकर रविवार को पश्चिम बंगाल आदिवासी अधिकार मंच की रानीगंज जोनल कमेटी का पांचवां सम्मेलन तिराट कम्युनिटी हॉल में आयोजित हुआ.सम्मेलन का उद्घाटन संगठन के जिला सचिव विनय हांसदा ने किया. इसमें करीब 250 आदिवासी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में संजय हेम्ब्रम को सचिव तथा दिनेश मुर्मू को अध्यक्ष बनाते हुए 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया.
इसी दिन पश्चिम बंगाल आदिवासी अधिकार मंच की कुल्टी जोनल कमेटी का सम्मेलन डीसेरगढ़ के छोटदिघारी इलाके के बसन धावड़ा में आयोजित हुआ. इसमें सौ से अधिक आदिवासी लोगों ने हिस्सा लिया और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर आवाज बुलंद की. सम्मेलन में लक्ष्मीराम हेम्ब्रम को सचिव और दुगाई टुडू को अध्यक्ष बनाकर 31 सदस्यीय कमेटी गठित की गयी.
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि कोयला खदानों के नाम पर आदिवासियों को अवैध रूप से विस्थापित करना बंद करना होगा.भूमिहीनों को पट्टा देने की मांग भी उठायी गयी. नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों के कारण देश के आदिवासी आज उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं.प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए उन्हें उनकी जमीन से बेदखल किया जा रहा है. वक्ताओं के अनुसार, देश में विस्थापित हुए करीब 10 करोड़ लोगों में 80 प्रतिशत मुख्य रूप से आदिवासी हैं.एसआईआर के नाम पर भी बड़ी संख्या में आदिवासियों के नाम हटाये जाने का आरोप लगाया गया. सम्मेलन के अंत में आदिवासियों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया गया.


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