सामाजिक न्याय मंच के सम्मेलन में केंद्र सरकार पर निशाना, गरीब-दलित-आदिवासी एकता का आह्वान
रानीगंज- सामाजिक न्याय मंच के पश्चिम बर्दवान जिला सम्मेलन में रानीसायेर के कांटागड़िया मैदान में बड़ी संख्या में लोग जुटे.खराब मौसम के बावजूद आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए संविधान, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और समान अधिकारों की रक्षा की बात कही सम्मेलन की अध्यक्षता दिलीप बाउरी ने की.
माकपा नेता रामचंद्र डोम ने आरोप लगाया कि भाजपा-आरएसएस देश में धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और समान अधिकारों को कमजोर कर मनुस्मृति आधारित व्यवस्था लागू करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि धर्म और जाति के नाम पर विभाजन को बढ़ावा देने से गरीब, दलित और श्रमिक वर्ग प्रभावित हो रहा है.उन्होंने सवाल उठाया कि बड़ी संख्या में दलित और आदिवासी आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों हैं.
केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए डोम ने आरोप लगाया कि कोयला खदानों और सरकारी कारखानों समेत देश की संपत्ति कॉरपोरेट क्षेत्र को सौंपी जा रही है.उन्होंने नयी शिक्षा नीति और सरकारी स्कूलों तथा अस्पतालों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाये.
सामाजिक न्याय मंच के राज्य सचिव अलकेश दास ने दावा किया कि जातिगत आधार पर दलितों पर हमले 57 प्रतिशत बढ़े हैं. उन्होंने पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार पर तृणमूल कांग्रेस के तरीके पर शासन करने का आरोप लगाया और विधानसभा चुनाव से पहले किये गये गैस, बिजली और अन्नपूर्णा भंडार संबंधी वादों का उल्लेख किया.
जिला सचिव नारायन बाउरी और आदिवासी अधिकार मंच के नेता विनय हांसदा ने भी संबोधित किया. सम्मेलन से गरीब, दलित और आदिवासी लोगों की एकजुटता का आह्वान करते हुए 6 अक्टूबर को कोलकाता में प्रस्तावित सभा को सफल बनाने की अपील की गयी.


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