कोलकाता : उत्तर 24 परगना के हालिशहर की घटना की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब कोलकाता के दिल कहे जाने वाले श्यामबाजार में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भारी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। मंगलवार को उत्तर कोलकाता के श्यामबाजार पांच माथा मोड़ पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर लौटते समय भीड़ के बीच से अचानक उन्हें निशाना बनाकर 'चोर-चोर' के नारे लगाए गए। इस घटना के बाद देखते ही देखते श्यामबाजार इलाका राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया।नेताजी के अपमान के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुआ हंगामातृणमूल खेमे का आरोप है कि भाजपा (BJP) नेतृत्व लगातार नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों का अपमान कर रहा है। इसी के विरोध में मंगलवार दोपहर 'कालीघाट तृणमूल' की ओर से श्यामबाजार में एक विरोध प्रदर्शन और माल्यार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाथ में क्रांतिकारी खुदीराम बोस की तस्वीर लेकर शामिल हुईं। उनके साथ सांसद कल्याण बनर्जी, डोला सेन और कुणाल घोष जैसे शीर्ष नेता भी मौजूद थे।विवाद तब शुरू हुआ जब कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ममता बनर्जी मंच से उतरकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ रही थीं। उसी दौरान आस-पास मौजूद भीड़ में से कुछ लोगों ने अचानक उनके खिलाफ तीखी नारेबाजी शुरू कर दी।48 घंटे के भीतर दूसरा विरोध, सियासी पारा चढ़ागौरतलब है कि बीते रविवार को ही हालिशहर में एक मृतक पार्टी कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने गईं ममता बनर्जी को अभूतपूर्व विरोध का सामना करना पड़ा था, जहाँ उनके काफिले पर कीचड़ और जूते फेंकने के आरोप लगे थे। उस घटना के महज 48 घंटे के भीतर कोलकाता के बीचों-बीच उन्हें दोबारा इसी तरह के जन-आक्रोश और नारेबाजी का सामना करना पड़ा है।राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप:इस घटना के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पार्टी का सीधा आरोप है कि भाजपा समर्थित असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर पूर्व मुख्यमंत्री को अपमानित करने के लिए यह साजिश रची। दूसरी ओर, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंद्रु अधिकारी और कोलकाता पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और प्रदर्शनकारियों को खुली छूट दे दी गई।श्यामबाजार में हुए इस हंगामे के बाद पूरे कोलकाता में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य में लगातार घट रही इस तरह की घटनाएं पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक गरमा रही हैं।

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