जामुड़िया : आसनसोल-जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और हरित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को निघा स्थित होटल सिटी रेजिडेंसी में ‘कार्बन मिटिगेशन एंड सीक्वेस्ट्रेशन’ विषय पर विशेष शैक्षिक-सह-प्रेरणात्मक सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में उद्योग संचालकों, चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों तथा पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया . इस दौरान औद्योगिक इकाइयों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने, कार्बन प्रबंधन, वायु गुणवत्ता में सुधार और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास पर विस्तार से चर्चा हुई.
कार्यक्रम का आयोजन जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी की पहल पर किया गया. टेक्नो इंडिया यूनिवर्सिटी, कोलकाता के रिसर्च डायरेक्टर प्रो. डॉ. अभिजीत मित्रा एवं उनकी टीम ने औद्योगिक क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी.रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स तथा जामुड़िया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने आयोजन में सहयोग किया.
उद्योग भी जरूरी, प्रदूषण नियंत्रण भी : विधायक
विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी ने कहा कि जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र आसनसोल ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है. उद्योगों से रोजगार मिलता है और सरकार को राजस्व भी प्राप्त होता है, लेकिन औद्योगिक गतिविधियों के साथ प्रदूषण भी एक वास्तविक चुनौती है. इसलिए कारखाना मालिकों और प्रबंधन को प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के प्रति जागरूक करना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले उन्होंने जामुड़िया में प्रदूषण कम करने और एयर क्वालिटी इंडेक्स में सुधार का वादा किया था. इसी दिशा में यह सेमिनार एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पहल है.उन्होंने कहा कि आमतौर पर उद्योग प्रबंधन की ओर से जनप्रतिनिधियों को बुलाया जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने स्वयं क्षेत्र के कारखाना संचालकों और निदेशकों को आमंत्रित कर प्रदूषण नियंत्रण को लेकर चर्चा की पहल की.
डॉ. मुखर्जी ने कहा कि उनका लक्ष्य जामुड़िया को बेहतर औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ बेहतर और हरित विधानसभा क्षेत्र बनाना है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि उद्योग प्रबंधन यदि प्रदूषण कम करने को लेकर गंभीरता से कदम उठाये, तो आने वाले एक वर्ष में क्षेत्र के एयर क्वालिटी इंडेक्स में सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है.
विधायक ने जामुड़िया में हरियाली बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने वन विभाग से जामुड़िया क्षेत्र के लिए एक लाख पौधों की मांग की थी, ताकि औद्योगिक क्षेत्र को अधिक हरा-भरा बनाया जा सके,हालांकि फिलहाल कुछ हजार पौधे ही उपलब्ध हो सके हैं. उन्होंने इसे नीति और व्यवस्था से जुड़ी कमी बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में इस दिशा में और प्रयास किया जायेगा.
उन्होंने कहा कि पांच वर्षों में कम से कम दो से तीन लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जा सकता है. इससे जामुड़िया में हरियाली बढ़ेगी और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.
उद्योग और पर्यावरण में संतुलन जरूरी : महेश सांवरिया
जामुड़िया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव महेश कुमार सांवरिया ने कहा कि जामुड़िया में उद्योगों का होना जरूरी है, क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और सरकार को राजस्व मिलता है. राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार भी प्रयास कर रही है.ऐसे में उद्योगों के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई. उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर ही क्षेत्र का स्थायी विकास संभव है.
कार्बन सोखने वाले पौधों पर भी जोर
टेक्नो इंडिया यूनिवर्सिटी, कोलकाता के रिसर्च डायरेक्टर प्रो. डॉ. अभिजीत मित्रा ने कहा कि जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र केवल आसनसोल ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है. उद्योगों से रोजगार और राजस्व मिलता है, लेकिन प्रदूषण भी एक चुनौती है. इसे कम करने के लिए वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य केवल भाषण तक सीमित रहना नहीं, बल्कि एक स्पष्ट विजन के साथ आगे बढ़ना है.जामुड़िया को हराभरा और प्रदूषण में कमी वाला औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए कार्बन सोखने वाले पौधों के बड़े पैमाने पर रोपण तथा ‘पंचवटी वन’ जैसे मॉडल विकसित करने पर भी चर्चा की गयी.
एक साल बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स में बदलाव देखने का लक्ष्य
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि उद्योगों के विकास को रोकना समाधान नहीं है. आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर कार्बन प्रबंधन और हरित उपायों के जरिये औद्योगिक गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जाये. आयोजकों ने उम्मीद जतायी कि उद्योग प्रबंधन, प्रशासन, विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयास से जामुड़िया के एयर क्वालिटी इंडेक्स में सुधार लाया जा सकता है.


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