कोलकाता: बालीगंज के पॉश इलाके में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिछाया गया ठगी का जाल आखिरकार ध्वस्त हो गया। गुप्त सूचना के आधार पर तकनीकी निगरानी और गहन जांच के बाद कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम थाने ने इस गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह मुख्य रूप से विदेशी नागरिकों, खासकर ब्रिटेन (UK) के लोगों को अपना शिकार बनाता था।पुलिस ने बालीगंज स्थित ठिकाने पर छापेमारी कर पहले तीन आरोपियों को पकड़ा। इसके बाद उनसे मिली जानकारी के आधार पर तालतला इलाके में दबिश देकर चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से कई लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।ब्रिटेन के नागरिक थे मुख्य 'टारगेट'पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने एक संगठित टीम तैयार कर रखी थी, जिसके सदस्य अंग्रेजी में बातचीत करने में माहिर थे। ये लोग खुद को प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधि बताकर विदेशी ग्राहकों को कॉल करते थे। वायरलेस डेटा सर्विस अपडेट, सिम कार्ड रिप्लेसमेंट या कस्टमर केयर सपोर्ट के नाम पर ये उन्हें अपनी बातों में फंसाते थे।वीओआईपी (VOIP) कॉलिंग के जरिए भरोसा जीतकर वे ग्राहकों के बैंक खातों, डेबिट/क्रेडिट कार्ड विवरण और पासवर्ड हासिल कर लेते थे। इसके बाद मिनटों में खातों से बड़ी मात्रा में पाउंड और डॉलर उड़ा लिए जाते थे। │ गिरफ्तार आरोपियों की सूची ┤│ 1. फिरदौस इकबाल (36) │ 2. शेख सज्जाद (36) ││ 3. रूपम टिमोथी बिस्वास (23) │ 4. शब्बीर आलम (47) डार्क वेब और बिहार से जुड़ा मास्टरमाइंडजांचकर्ताओं का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बिहार का रहने वाला है। वह डार्क वेब और अन्य स्रोतों से विदेशी ग्राहकों का गोपनीय कॉलिंग डेटा (लीड्स) हासिल कर बालीगंज के इस कॉल सेंटर को सप्लाई करता था।ईडी और आयकर विभाग को दी जाएगी जानकारीकोलकाता साइबर क्राइम थाने में इस मामले (केस नंबर: 44/26) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों का पता लगाकर उन बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।मामले की गंभीरता और वित्तीय धोखाधड़ी के दायरे को देखते हुए पुलिस जल्द ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग को भी इसकी जानकारी सौंपने की तैयारी में है।



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