सिंघारन नदी अतिक्रमण मामला: मंत्री अग्निमित्रा पाल की 'बुलडोजर' चेतावनी पर सियासत गर्म, चैंबर ऑफ कॉमर्स ने दी सफाई

स्थानीय निवासी बोले- दशकों से सुन रहे हैं सिर्फ वादे, अब कार्रवाई की उम्मीद

जामुड़िया चैम्बर ऑफ कॉमर्स का दावा- 2020 की जांच में उद्योगों द्वारा अतिक्रमण का नहीं मिला था कोई ठोस प्रमाण



जामुड़िया-जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली सिंघारन नदी के अस्तित्व को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. राज्य की शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल द्वारा नदी पर अवैध अतिक्रमण करने वाले कारखानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और बाउंड्री वॉल पर बुलडोजर चलाने के बयान के बाद यह मामला गरमा गया है. जहां एक तरफ स्थानीय लोग और राजनीतिक दल इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक संगठनों ने इस पर संतुलित रुख अपनाने की वकालत की है.


भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर: अग्निमित्रा पाल

 शुक्रवार को जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र का दौरा करते हुए मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कड़ा रुख अख्तियार किया.उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र के कुछ कारखानों ने नदी को बाउंड्री वॉल के भीतर घेरकर उसे अपनी निजी संपत्ति बना लिया है.


मंत्री ग्निमित्रा पाल ने कहा कि पिछली सरकारें किस सेटिंग पर चलती थीं, हमें नहीं पता. लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की वर्तमान सरकार किसी 'सेटिंग' से नहीं चलती. भ्रष्टाचार पर हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी. जिन उद्योगों ने नदी की जमीन पर कब्जा किया है, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और बाउंड्री वॉल को बुलडोजर से तुरंत ढहा दिया जाएगा ताकि नदी अपनी स्वाभाविक दिशा में बह सके.


100 फीट की नदी सिमटकर रह गई 15 फीट में: भुक्तभोगी जनता

मंत्री के इस बड़े एलान का स्थानीय स्तर पर स्वागत तो हुआ है, लेकिन जनता के मन में पुराने अनुभवों को लेकर संशय भी है. जामुड़िया के इकड़ा गांव के निवासी और बचपन से नदी बचाओ आंदोलन से जुड़े अक्षय बनर्जी ने कहा की मैं कक्षा 8 से इस आंदोलन से जुड़ा हूं. वामपंथियों और टीएमसी के शासनकाल में भी ऐसे कई एलान सुने, लेकिन सार्थक कदम नहीं उठाए गए. अब भाजपा सरकार से उम्मीद है कि यह केवल एलान तक सीमित न रहे. अक्षय बनर्जी और भाजपा जिला कमेटी के सदस्य निरंजन सिंह ने बताया कि कभी 100 फीट चौड़ी रहने वाली यह नदी अवैध अतिक्रमण के कारण अब महज 10 से 15 फीट का नाला बनकर रह गई है. इसके चलते बरसात के दिनों में नदी का पानी पास के श्मशान घाट में घुस जाता है. मानसून में यदि किसी के परिजन की मृत्यु हो जाती है, तो जलजमाव के कारण लोग वहां अंतिम संस्कार नहीं कर पाते और उन्हें शव लेकर दूर जाना पड़ता है.निरंजन सिंह ने मांग की है कि नदी को जल्द से जल्द अपनी पूर्व अवस्था में लौटाया जाए और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो.


चैंबर ऑफ कॉमर्स का पक्ष: उद्योग और पर्यावरण दोनों का ध्यान रखना जरूरी

इस पूरे विवाद के बीच जामुड़िया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव महेश कुमार सावड़िया ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक दस्तावेज का हवाला देते हुए उद्योगों का पक्ष रखा है.


महेश सावड़िया ने बताया कि 20 जून 2020 को आसनसोल के तत्कालीन एसडीओ के निर्देश पर सिंघारन नदी की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए एक संयुक्त टीम गठित की गई थी. इस टीम में बीडीओ, थाना प्रभारी (ओसी), बीएलआरओ और जामुड़िया चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष व सचिव शामिल थे. संयुक्त निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे साबित हो कि किसी उद्योग ने जानबूझकर नदी पर कब्जा किया या उसकी धारा बदली. चैंबर ऑफ कॉमर्स का कहना है कि यदि अनजाने में किसी उद्योग से नदी को क्षति पहुंची भी है, तो प्रशासन, स्थानीय प्रतिनिधियों और उद्योगपतियों की बैठक बुलाकर व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए,.


 जामुड़िया एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है जहां हजारों श्रमिकों की आजीविका टिकी है.इसलिए नदी संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र की औद्योगिक व्यवस्था और रोजगार को ध्यान में रखकर ही कोई संतुलित निर्णय लिया जाना चाहिए.


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