रानीगंज: संत रविदास की 650 वीं जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित उनकी जन्मस्थली से निकली पावन मंगल कलश यात्रा शुक्रवार को कोयलांचल रानीगंज पहुंची. संत रविदास की जन्मभूमि की पवित्र मिट्टी और स्मृतिचिह्न लिए इस कलश के आगमन से आसनसोल-रानीगंज क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला.
यह मंगल कलश संत रविदास की जन्मस्थली सिर गोवर्धनपुर (वाराणसी) की पवित्र मिट्टी और स्मृति-चिह्नों को लेकर देशव्यापी यात्रा पर निकला है. 650वीं जयंती समारोह के तहत गुरुवार को वाराणसी से शुरू हुई यह यात्रा शनिवार को कोलकाता के तिलजला स्थित संत रविदास मंदिर पहुंचेगी, जहां कलश की स्थापना पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी करेंगे.
शुक्रवार को सबसे पहले आसनसोल के जुबली पेट्रोल पंप क्षेत्र में मंगल कलश का भव्य स्वागत किया गया. श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की.इसके बाद कलश को पालकी में लेकर शोभायात्रा निकाली गई.
इस अवसर पर भाजपा के पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य, पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी, बाराबनी के विधायक अरिजीत राय, भाजपा के जिला महासचिव अपूर्व हाजरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
शोभायात्रा इसके बाद क्षेत्र के प्रसिद्ध मां घाघरबुड़ी मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना की गई. वहां से यात्रा रानीगंज के प्रमुख चौराहे पंजाबी मोड़ पहुंची. यहां ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं तथा भाजपा कार्यकर्ताओं ने संत रविदास को श्रद्धांजलि अर्पित की.
कार्यक्रम में भाजपा के जिला सदस्य दिनेश सोनी, जिला महासचिव राजा भौमिक, मनीष शर्मा, शंकर साव, सुनील साव सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे.
संत रविदास का योगदान
संत रविदास मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत, कवि और समाज सुधारक थे. उन्होंने जाति-पांति और ऊंच-नीच का विरोध करते हुए मानवता, समानता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया. उनकी रचनाओं को सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी स्थान मिला है. मान्यता है कि भक्त कवयित्री मीराबाई उन्हें अपना गुरु मानती थीं. संत रविदास ने ईश्वर भक्ति में जाति, धर्म और वर्ण के भेदभाव को नकारते हुए मन और कर्म की पवित्रता को सर्वोपरि बताया.
शनिवार को कोलकाता पहुंचने के साथ ही इस विशेष मंगल कलश यात्रा का समापन होगा.



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