सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा वीडियो, कौतूहल के साथ उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
लोग बोले- ईश्वर की आराधना सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं, ब्रह्मांड के कण-कण में हैं रामभक्त
रानीगंज-स्थानीय श्री श्याम मंदिर में आज एक ऐसा हैरतअंगेज और अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जिसने विज्ञान और आम मानवीय सोच से परे आस्था के प्रभाव को एक बार फिर साबित कर दिया. अमूमन मंदिरों में बंदरों का आना-जाना और उछल-कूद करना बेहद आम बात है, लेकिन गुरुवार को मंदिर परिसर में पहुंचे एक वानर ने जो किया, उसे देखकर वहां मौजूद पुरोहितों से लेकर आम श्रद्धालु तक दंग रह गए. स्वयं हनुमान जी का रूप माने जाने वाले इस वानर ने मंदिर में स्थापित श्री सालासर बालाजी की मूर्ति के सामने न केवल शीश नवाया, बल्कि काफी देर तक हाथ जोड़कर आराधना की मुद्रा में बैठा रहा.
सालासर हनुमान के सामने विहंगम दृश्य, मोबाइल में कैद करने लगे लोग
बीते 22 फरवरी 2024 को हुई इस श्री श्याम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद से ही रानीगंज का श्री श्याम मंदिर अपनी महिमा और भव्यता के लिए पूरे क्षेत्र में श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. रोजाना की तरह गुरुवार भी सैकड़ो श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारबद्ध थे.इसी बीच एक वानर से मंदिर के भीतर दाखिल हुआ,जो काफी देर तक उछल कूद करता रहा,भक्त गन उसे मंदिर से बाहर करने का प्रयास करते रहे,तभी वह सीधे मंदिर में स्थापित सालासर हनुमान जी की विग्रह (मूर्ति) के सामने हाथ जोड़कर जाकर बैठ गया. हैरान करने वाली बात यह थी कि उसने बिना किसी को नुकसान पहुंचाए या बिना किसी उछल-कूद के, अपने दोनों हाथ जोड़े और आंखें मूंदकर काफी देर तक बैठा रहा.एक बंदर का इस तरह बिना विचलित हुए, इंसानों की भांति हाथ जोड़कर इतनी शांति और एकाग्रता से बैठना किसी चमत्कार से कम नहीं है. यह दृश्य देखकर आंखों में आंसू आ गए। यह साक्षात भक्ति और आस्था का जीवंत प्रमाण है.
इस अलौकिक और दुर्लभ दृश्य को देखकर मंदिर में मौजूद श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खो बैठे और तुरंत इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने लगे. कुछ ही घंटों में इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया.वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वानर किस तरह एक सच्चे भक्त की तरह पूरी तन्मयता से भगवान के सामने ध्यानमग्न है.
कण-कण में व्याप्त है ईश्वर की भक्ति
इस घटना को लेकर मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रबुद्ध जनों का कहना है कि यह घटना इस बात का साक्षात प्रमाण है कि भक्ति का संबंध सिर्फ इंसानों से नहीं, बल्कि इस चराचर जगत के हर जीव और प्राणी से है. त्रेतायुग में जिस तरह वानर सेना ने प्रभु श्रीराम की सेवा की थी, कलयुग के इस दृश्य ने आज के दौर में भी उस अगाध आस्था की यादें ताजा कर दी हैं. मंदिर में इस घटना के बाद से सालासर हनुमान जी के जयकारों की गूंज और तेज हो गई है.




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