हॉलीवुड थ्रिलर भी फेल! बाली के 'फर्जी मुख्यमंत्री' अभिजीत का कारनामा देख पुलिस भी हैरान



हावड़ा  : आज के दौर में जहां बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, वहीं हावड़ा के बाली (राम नवमीतला) के रहने वाले 26 वर्षीय युवक अभिजीत मंडल ने अपने लिए एक ऐसा 'पार्ट-टाइम काम' चुना, जिसे सुनकर किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म के लेखक भी दंग रह जाएं।अभिजीत वैसे तो बेरोजगार है और कभी-कभार अपने पिता की सब्जी की दुकान पर हाथ बंटाता है। लेकिन घर लौटते ही उसका अंदाज पूरी तरह बदल जाता था। मोबाइल हाथ में आते ही वह कभी राज्य का बड़ा प्रशासनिक अधिकारी (IAS/IPS), कभी प्रभावशाली राजनीतिक नेता, तो कभी सीधे मंत्री बन जाता था।दूसरे राज्यों के बड़े अफसरों पर चलाता था हुकूम.



अभिजीत का 'टैलेंट' सिर्फ अपने राज्य तक ही सीमित नहीं था। वह फोन पर दूसरे राज्यों के मंत्री और यहां तक कि 'मुख्यमंत्री' बनकर अन्य राज्यों के बड़े सरकारी विभागों में फोन घुमा देता था। जब दूसरी तरफ बैठे बड़े-बड़े अधिकारी उसे सचमुच का मुख्यमंत्री समझकर "यस सर, नो सर" कर रहे होते थे, तब अभिजीत अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे उन पर हुकूम चला रहा होता था।



पुरानी आदत: पहले भी काट चुका है जेल की हवाकहते हैं कि अति हर चीज की बुरी होती है। जब फोन कर वीआईपी अंदाज में आदेश-निर्देश देने की उसकी यह आदत हद से ज्यादा बढ़ गई, तो पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। मोबाइल लोकेशन को ट्रैक करते हुए जब बाली थाना पुलिस राम नवमीतला पहुंची, तो पता चला कि यह तो उनका 'पुराना ग्राहक' है।दरअसल, अभिजीत पहले भी हूबहू इसी तरह की धोखाधड़ी के आरोप में जेल की हवा काट चुका है। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद कुछ दिन तो वह शांत रहा, लेकिन जल्द ही उसने दोबारा यही खेल शुरू कर दिया। गत 2 जुलाई की रात बाली थाना पुलिस ने उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया है।


सबसे बड़ा ट्विस्ट: पैसे के लिए नहीं, सिर्फ 'रौब' झाड़ने का था नशा!इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस ने उसकी कुंडली खंगालना शुरू किया। पुलिस यह सोचकर जांच कर रही थी कि इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा कर इस लड़के ने कितने करोड़ रुपये की ठगी की है या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट शामिल है?पुलिस जांच में बड़ा खुलासा: जांच अधिकारियों के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब पता चला कि अभिजीत ने इस फर्जीवाड़े से एक भी रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी नहीं की है। उसका कोई आपराधिक या लालच भरा मकसद ही नहीं था। वह किसी पैसे के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ "फोन पर मंत्री-मुख्यमंत्री बनकर अफसरों पर रौब झाड़ने" के एक अजीबोगरीब नशे और रोमांच (थ्रिल) के लिए ऐसा करता था। उसे अधिकारियों को अपने इशारों पर नचाने में मजा आता था।बाली थाना पुलिस अब इस बात को लेकर सोच में पड़ी है कि यह किस तरह का अजीब शख्सियत (कैरेक्टर) है, जो सिर्फ शौक के लिए मुख्यमंत्री बन जाता है। पुलिस को डर है कि जमानत मिलने के बाद यह लड़का अगली बार न जाने किसकी फर्जी पहचान (आइडेंटिटी) का इस्तेमाल कर बैठे!

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