रानीगंज-सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) की रानीगंज शाखा ने पश्चिम बंगाल में 'कारखाना और उद्योग बचाओ - काम बचाओ - जिला बचाओ - बंगाल बचाओ' की मांग को लेकर 7 दिसंबर से 15 दिसंबर तक पदयात्रा का आयोजन किया गया.
पदयात्रा के मुख्य उद्देश्य और मुद्दे
यह पदयात्रा रानीगंज के गिरजा पाड़ा काठगादा से शुरू होकर कोयला मजदूर संगठन कार्यालय के पास समाप्त हुई, जिसमें सीटू के सदस्यों के अलावा किसान, खेत मजदूर, महिला, छात्र और युवा संगठनों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया.
इस पदयात्रा में केंद्र और राज्य सरकार से बंद पड़े कारखानों को बचाने और सरकारी जमीन पर नया कारखाना बनाकर रोज़गार सृजित करने की तत्काल पहल की मांग. बंगाल में बिगड़ती महिला सुरक्षा और बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर प्रशासन की विफलता पर सवाल. दामोदर और अजय नदियों में बालू चोरी के कारण हो रहे पर्यावरण नुकसान पर स्थानीय प्रशासन की अनदेखी का आरोप. केंद्र सरकार के चार श्रम कोड्स का कड़ा विरोध, जिन्हें श्रमिकों के अधिकार छीनने वाला बताया गया. कोयला, रेल और इस्पात जैसे महत्वपूर्ण उद्योगों के निजीकरण की योजना पर तीव्र आक्रोश.अन्य सामाजिक मुद्दों में स्कूलों को बंद करने, चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, 100 दिन का काम बंद होने, बढ़ती कीमतों और बस्तिबासियों को उजाड़ने के विरोध में आवाज उठाई गई.सीटू नेता सुप्रियो रॉय ने भाजपा की नीतियों का विरोध सिर्फ 'दिखावे' के लिए करने और श्रम कोड्स जैसे श्रमिकों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खामोश रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि
इन सभी मुद्दों पर वामपंथियों का आंदोलन जारी रहेगा, और अगले 15 दिसंबर को काजोड़ा में एक विशाल सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसे वरिष्ठ वामपंथी नेता मोहम्मद सलीम संबोधित करेंगे.



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