रानीगंज के बड़ा बाजार का 300 वर्ष प्राचीन काल मन्दिर,जहां 8 पीढ़ी से पूजा करते आ रहे है चटर्जी परिवार



रानीगंज-रानीगंज के विभिन्न इलाकों में बीते वर्ष की भांति इस बार भी धूमधाम से मां काली की पूजा का आयोजन की तैयारी की जा रही है , लेकिन इनमें से रानीगंज के बड़ा बाजार स्तिथ बड़ा काली मंदिर की पूजा बेहद प्रख्यात है. प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां पर पिछले 300 वर्षों से मां काली की पूजा होती आ रही है .पहले यहां पर श्मशान घाट हुआ करता था. अब यहां पर मां काली की एक भव्य मंदिर है ,जहां पर हर साल धूमधाम से मां काली की पूजा का आयोजन किया जाता है. इस बारे में मंदिर के पुरोहित सुकांतो चटर्जी ने बताया कि उनके पूर्वज पिछले 300 वर्षों से इस मंदिर में मां काली की पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं. वह लोग मुलत अंडाल के रहने वाले हैं, और वहां से आकर इस मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं. यहां पर महालया के दिन मां काली की प्रतिमा का विसर्जन होता है, उसके बाद नए सिरे से पुराने मेड़(पुआल का बना ढांचा) मां काली की प्रतिमा का निर्माण शुरू हो जाता है. काली पूजा से एक दिन पहले मां की विशाल मूर्ति स्थापित की जाती है और पूजा के दौरान 10 हजार से भी ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में आते हैं .यहां पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है और पाठा बलि भी होती है. यहां पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भोग का वितरण किया जाता है . इस मंदिर का अपना ही माहत्म्य है जो भी यहां पर सच्चे मन से मां से प्रार्थना करते हैं उनकी प्रार्थना जरूर सुनी जाती है और उनकी इच्छा पूरी होती है.

पुरोहित चटर्जी ने बताया कि 300 साल पहले अंडाल गांव के उनके पूर्वज ताराचरण चट्टोपाध्याय का अंतिम संस्कार उनकी मां के निर्देश पर पंचमुंडी आश्रम में इसी श्मशान क्षेत्र में किया गया था, जहां परिवार के लोगो की मृत्यु के पश्चात दाह संस्कार किया करते थे. ढाई सौ वर्षों के बाद इसी श्मशान स्थित काली की प्रतिमा स्थापित कर मां की पूजा-अर्चना की गयी है. मालूम हो कि साल के 11 महीने यहां पूजा होती है, लेकिन एक महीना मां काली अपने माता-पिता के घर जाती हैं. काली पूजा के तहत चट्टोपाध्याय परिवार के सदस्य मां की नयी मूर्ति बनाते हैं और पूजा संपूर्ण करते हैं. अभी भी नियमानुसार , महालया के बाद वाले सोमवार को मां काली की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है. एक महीने तक प्रतिमा का निर्माण किया जायेगा और काली पूजा के दिन से मां की पूजा शुरू हो जायेगी.उन्होंने . यह उनकी आठवीं पीढ़ी है जो यहां पर पूजा कर रही है.

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