विभिन्न मांगों को लेकर निमचा हाई वॉल माइनिंग प्रोजेक्ट का कार्य ठप्प कर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया





रानीगंज-आदिवासी समुदाय की विभिन्न मांगों को लेकर रानीगंज के तिराट क्षेत्र अवस्थित सातग्राम एरिया के नीमचा हाल हाईवाल माइन्स की कोयला खदान बुधवार उत्पादन ठप रही. निमचा हाईवाल खदान के बाहर विभिन्न बैनरों के साथ तिराट ग्रामीण क्षेत्र के छह आदिवासी मुहल्ला हराभंगा, बेगुनिया पाड़ा, वाकद पाड़ा , पारुल डांगा, हारनपुर गाँव के लोगों के भविष्य पर संकट आ गया है.

उनकी प्रमुख मांगों में आस-पास के गांव जो माइनिंग प्रोजेक्ट की वजह से भविष्य में धंसान की चपेट में आने से पहले उन्हें पुनर्वासित करना, प्रोजेक्ट की वजह से सड़कों पर बड़े वाहनों के चलने से अत्यधिक मात्रा में धूल उड़ना जिससे बीमारियों की आशंका को रोकने के लिए सड़कों पर जल छिड़काव, भारी वाहनों के चलने से सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से सड़कों की मरम्मतीकरण था. आदिवासी महिलाओं, पुरुषों ने बुधवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक तंबू गाड़ कर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कॉफ़ी समय से ईसीएल के अधिकारियों ने आदिवासी समुदाय के लोगों से उनकी मांग पर कार्रवाई करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं किया. कोयला खदानों के उत्पादन के कारण आस-पास के इलाकों में रहने वाले कई आदिवासी समुदायों के घरों में विस्फोट होने से दरारें आ गईं, उसी तरह इस खदान के बनने से आस-पास के इलाकों के जलस्रोत सूख गए. और इसके साथ ही उस कोयला खदान में क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन क्षेत्र के युवा बेरोजगार हैं क्योंकि उन्हें कोई काम नहीं दिया जाता है.इन सभी मांगों के साथ, उन्होंने तत्काल पुनर्वास, पर्याप्त पेयजल और पीने योग्य पानी की व्यवस्था, क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत और रोजगार की मांग को लेकर विरोध किया.तपती धूप में उन्होंने विरोध जताया.इस विषय मे स्थानीय कोलियरी के पर्सनल मैनेजर सुमित चौधरी से बात की तो उन्होंने कहा कि ईसीएल हमेशा स्थानीय लोगों की जरूरतों के प्रति सहानुभूतिशील रहा है ,यहां भी उसका पालन किया जाएगा .उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की कि वह अपनी मांगे प्रबंधन को दें जिससे कि वह उन मांगों को अपने उच्च अधिकारियों तक पहुंचा सके. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि इस तरह से प्रदर्शन करने के बजाय अपनी मांगों को वह अधिकारियों तक रखें इसके बाद ही आदिवासी समाज के लोगों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया. आदिवासी संगठनों के नेताओं में बिशु हेम्ब्रम, गोविंद चाडे, मोंटू किस्कू, बैद्यनाथ हेम्ब्रम, सुनील किस्कू, बिमान मुर्मू, तपन मोदी कोड़ा माणिक मोदी कोड़ा आदि ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया .

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