दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमिनार के बैनर से मोनालिसा का नाम हटाया
यूनिवर्सिटी द्वारा अचानक से उठाए गए इस कदम पर सेमिनार के आयोजक कर्ताओं ने साधी चुप्पी, पहचानने तक से किया इनकार
विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम की याद मे यूनिवर्सिटी मे आयोजित किया गया है दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमिनार
पार्थो चटर्जी की काफ़ी करीबी होने की फैली खबर के बाद से पिछले तीन सप्ताह से लापता है यूनिवर्सिटी बांग्ला विभाग की एच ओ डी मोनालिसा दास
आसनसोल-पश्चिम बंगाल सिक्षक घोटाले मामले मे पिछले सात दिनों से चल रही केंद्रीय एजेंसी ईडी की लगातार छापेमारी और करवाई के दौरान राज्य के पूर्व सिक्षा मंत्री व वर्तमान के केबिनेट मंत्री पार्थ चटर्जी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है, साथ मे उनकी काफ़ी करीबी महिला दोस्त अभिनेत्री अर्पिता मुखर्जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है, 23 जुलाई से अर्पिता और पार्थ पटर्जी ईडी के गिरफ्त मे हैं, हालांकि ईडी के पूछताछ के दौरान पार्थ चटर्जी ने ईडी के सामने अपना कभी भी मुह नही खोला, पर उनकी महिला दोस्त व उनकी राजदार अर्पिता ने सलाखों के पीछे जाने के भय से अपना मुह ऐसा खोला की ईडी की टीम को अर्पिता के टोलीगंज इलाके मे स्थित एक फ्लेट से 15 करोड़ रूपए कैश मिले साथ मे सोने और चाँदी के गहनो के साथ कई फ्लेटों और जमीनों के कागजात भी बरामद हुये, जिसके बाद अर्पिता ने जैसे ही अपनी मुह दूसरी बार खोली तो उसके बेलघड़िया स्थित एक फ्लेट से करीब 29 करोड़ रूपए कैश व पाँच किलो सोने और चाँदी के आभूषण सहित कई प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले, जिसके आधार पर ईडी की टीम ने बोलपुर के शांतिनिकेतन स्थित एक फाम हाउस का पता चला, नोटों की संख्या इतनी थी की ईडी की टीम को नोट गिनने वाली मशीन मंगवानी पड़ी, और करीब 10 घंटों तक नोटों की गिनती चली जिसके बाद सभी नोटों को स्टील के बड़े - बड़े बक्शो मे भरकर ले जाया गया, वहीं साऊथ 24 परगना के बेगमपुर मे भी अर्पिता के नाम से एक फाम हाउस पाया गया, नॉर्थ 24 परगना के चिनार पार्क मे भी अर्पिता के एक फ्लेट होने की खबर मिली जिस फ्लेट को अर्पिता ने 2017 मे ख़रीदा था, पर फ्लेट कमिटी की माने तो अर्पिता ने 2020 से फ्लेट का मेन्टनेन्स चार्ज नही दिया है, जो चार्ज करीब 38 हजार रूपए हो गया है, वहीं
हुगली जिले के जांगिपाड़ा स्थित मथुरा बाटी इलाके मे अर्पिता ने एक घर बनवाया है, जिस घर मे अंडर ग्राउंड तैखाना है, बताया जा रहा है की वो तैखाना पैसे रखने के लिये ही बनवाया गया था, वहीं साऊथ 24 परगना के ही
बानतल्ला चर्म नगरी के पीछे कपास हाटी मौजा मे लगभग 10 बीघा जमीन भी अर्पिता के नाम से पाया गया इलाके के लोग जानते हैं की यह जमीन पार्थो चटर्जी का है, जाँच के दौरान पार्थ चटर्जी ने बीमार होने का दावा किया पर ईडी को सक हुआ की पार्थ चटर्जी कहीं ना कहीं ईडी को उनकी जाँच मे बीमार होने का बहाना कर उन्हें गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, ईडी ने कोलकाता उच्च न्यालय की अनुमति ली और उनकी बेहतर इलाज के लिये उड़ीसा के भुवनेश्वर स्थित एम्स अस्पताल मे ले गये, जहाँ चिकित्सकों के दल ने उनकी गहमी से जाँच की और अपने रिपोर्ट मे यह कहा की पार्थ चटर्जी को ऐसी कोई बीमारी नही है, जिस बीमारी को लेकर उनको अस्पताल मे भर्ती किया जाये, वो बढ़ती उम्र के दौरान होने वाली समस्याओं से ग्रस्त हैं, जो उनके व उनके स्वास्थ्य के लिये नुकसान दायक नही है, ऐसे मे पार्थ चटर्जी के तमाम बहाने धरे के धरे रह गये पार्थ को ईडी ने वापस कोलकाता लाया और सिक्षक घोटाले मामले मे जाँच सुरु करते हुये एक बार फिर से पूछताछ सुरु कर दी.
ऐसे मे कोलकाता उच्च न्यालय ने भी हर 48 घंटे मे पार्थ और अर्पिता की स्वास्थ्य जाँच के आदेश दे दिये, उसी दौरान ममता ने अपने केबिनेट बैठक मे पार्थ चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया, वहीं उनके भतीजे अभिषेक बैनर्जी ने भी तृणमूल भवन मे पार्टी के वरिस्ट नेताओं को लेकर बैठक की और पार्थ को पार्टी से ही निकाल बाहर किया, ऐसे मे जैसे ही यह खबर पार्थ तक पहुँची पार्थ टेंसन मे आ गए, और कोलकाता के जोका स्थित ईएस आई अस्पताल मे अपनी स्वास्थ्य जाँच करवाने जाने के दौरान उन्होंने मिडिया से यह कहकर राज्य की राजनितिक गलियारे मे भूचाल ला दिया की उनको सडयंत्र रचकर फंसाया गया है, वहीं हमेशा लाइम लाइट की दुनिया मे रहने वाली अर्पिता ने भी ईडी की चल रही जाँच व उनकी कस्टडी मे रह- रहकर अपना सब्र खो दिया, और वह फुट - फुटकर रोने लगी, वहीं अब अंदाजा लगाया जा रहा है की जिस तरह अर्पिता ने अपना मुह खोलकर सिक्षक घोटाले मामले मे ईडी का साथ दे रही है, ठीक वैसे ही अब पार्थ भी अपना मुह खोलेंगे और ईडी की जाँच मे मदद करेंगे, अगर ऐसा हुआ तो यह अनुमान लगाया जा रहा है की इस घोटाले मे कई सरकारी मुलाजिमो के साथ -साथ सफ़ेद पोश बे नकाब होंगे, अगर हम पार्थ की एक और करीबी मोनालिसा दास की बात करें तो मोनालिसा दास नदिया जिले के कल्याणी की रहने वाली हैं, और वह आसनसोल मे स्थित काजी नजरुल यूनिवर्सिटी मे बांग्ला विभाग की एच ओ डी के पोस्ट पर तैनात हैं, वह आसनसोल मे एक किराये के मकान मे रहती हैं, बताया जा रहा है की उनका एक घर बिरभूम जिले के बोलपुर शांतिनिकेतन मे भी है, वह पिछले तीन सप्ताह से आसनसोल मे नही हैं, सूत्रों से मिली जनकारी से यह पता चला है की वह बांग्लादेश गई हैं, यहीं नही ईडी के जाँच के घेरे मे मोनालिसा के आने की खबर सामने आते ही अब यूनिवर्सिटी ने भी मोनालिसा दास से अपना किनारा कर लिया है, जिसका प्रमाण यूनिवर्सिटी मे चल रहे विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम की याद मे दो दिवसीय सेमिनार के दौरान सामने आया है, यूनिवर्सिटी के पोर्टल मे तीन दिनों पहले एक बैनर लगा था, जिस बैनर मे मोनालिसा का फोटो लगा था जिसमे उनको चीफ एडवाइजर के तौर पर रखा गया था, पर दो दिन बाद उस बैनर को हटा लिया गया, और एक और बैनर अपलोड किया गया, जिस बैनर मे मोनालिसा का नाम गायब है, जब सेमिनार के आयोजक कर्ताओं से इस पुरे मामले मे बात की गई तो उन्होंने इस मामले मे अपनी चुप्पी साध ली और मामले मे कुछ भी बोलने से साफ इनकार करते हुये यह कहा की दूसरी विषय पर अगर बात हो तो अच्छा है, मोनालिसा के मुद्दे पर वह कुछ भी बात नही करना चाहते, वहीं सेमिनार मे उपस्थित एक और सदस्य ने मोनालिसा को पहचानने तक से इनकार कर दिया, ऐसे मे यूनिवर्सिटी के तरफ से मोनालिसा को लेकर बनाई जा रही यह दुरी कुछ और ही इसरा कर रही है, हालांकि यूनिवर्सिटी सूत्रों के हवाले से यह भी पता चला है की मोनालिसा की छुट्टी तीन अगस्त को ख़त्म हो जायेगी, यानि के वो चार अगस्त को यूनिवर्सिटी जॉइन कर सकती हैं, जिसपर केंद्रीय एजेंसि ईडी की भी नजर है, तो क्या मोनालिसा तीन अगस्त को एक बार फिर से यूनिवर्सिटी मे देखि जा सकती हैं, या फिर उनको एजेंसियों की छान बिन का पहले ही आभास हो चूका था, जिस कारण वह पहले ही इस मामले से खुदको दूर करते हुये कहीं फरार हो गई,


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