रानीगंज-रानीगंज की ऐतिहासिक रथ यात्रा उत्सव पिछले 2 सालों से कोरोना महामारी के कारण नहीं हो पाया था. इस वर्ष कोरोना के मामले कम होते ही काफी हर्ष उल्लास के साथ रानीगंज के सीआरसोल राज परिवार का रथ यात्रा उत्सव शुरू हुआ.परम्परा के अनुसार राज परिवार के सदस्य विट्ठल मालिया तथा हजारों की संख्या में भक्तगण ने पीतल से बने रथ को नए राजबाड़ी से पुराने राजबाड़ी तक खींच कर ले गए. रथयात्रा के संदर्भ में विट्ठल मालिया ने बताया कि वर्ष 1925 से पूर्व पुरी के रथ के रूप में एक लकड़ी का रथ रथ यात्रा के दिन नए महल से पुराने महल ले जाया जाता था. राजपरिवार के हॉल में रथ को रखा जाता था, मगर उस रथ में वर्ष 1926 को आग लग जाने के कारण वह लकड़ी का रथ जलकर राख हो गया. ततपश्चात सियारसोल के राज परिवार के सदस्य प्रमथनाथ माल्या ने कोलकाता के चितपुर के एक शिल्पी से पीतल का रथ बनवाया.रथ के चारों तरफ रामायण, महाभारत के देव देवियों की लीला, कृष्ण लीला आदि को स्थापित किया गया हैं. इस रथ में जगन्नाथ, बलराम ,सुभद्रा के साथ कुलदेवता दामोदर चंद्र जीऊ शीर्ष पर विराजमान होते हैं. पहले रथ पुराने राजबाड़ी से नए राजबाड़ी ले जाया जाता था मगर कुछ वर्षों से रथ को नए राजबाड़ी से पुराने राजबाड़ी ले जाया जा रहा है. पुरी के जगन्नाथ देव के रथ यात्रा के समय ही यहां से भी रथ यात्रा निकलती है और मेले का आयोजन होता है. अति प्राचीन इस रथयात्रा में ग्रामीणों के बात को ध्यान में रखते हुए,नई नई दुकानों के साथ कृषि सहायक सामग्रियों की भी दुकानें लगाई जाती हैं. यह मेला कुल 8 दिनों तक चलेगा,जिसे संचालन करने में सीआरसोल स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एसोसिएशन के द्वारा की जाती है. इस वर्ष इस मेले को 98 वर्ष पूर्ण हुए.इस रथ पूजा में आसनसोल नगर निगम के एम आई सी सह पार्षद दिवेन्दु भगत,पूर्व पार्षद कंचन तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे.

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