रानीगंज- पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का 102 वीं जन्म जयंती रानीगंज के बल्लभपुर स्थित  बल्लभपुर पेपर मिल यूनियन के तरफ से  पेपर मिल यूनियन कार्यालय में मनाई गई. इस अवसर पर रानीगंज के पूर्व विधायक रुनु दत्ता, आजादी प्रसाद, हेमंत प्रभाकर, कमलाकांत पाल ,सहित काफी संख्या में सीटू सदस्य उपस्थित थे. इस मौके पर रुनु दत्ता ने ज्योति बसु के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्योति बसु बैरिस्टर होते हुए भी उन्होंने कभी वकालत नहीं की, वह हमेशा श्रमिक आंदोलन के साथ जुड़े रहे एवं रानीगंज पेपर मिल यूनियन कार्यालय में उनका कई बार आना हुआ. राज्य को नई दिशा की ओर ले जाने में ज्योति बसु का अवदान कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है. इस अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें लाइफलाइन ब्लड बैंक द्वारा 20 यूनिट रक्त संग्रह की गई. इस मौके पर अंचल के 10 मेधावी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक के छात्र छात्राओं को सम्मानित किया गया.


 दूसरी ओर कुनुस्टोरिया फुटबॉल मैदान में भी शुक्रवार को एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया. जहां 30 यूनिट रक्त संग्रह किया गया. सीटु और डीवाईएफआई अजय ईस्ट एरिया कमेटी की तरफ से तथा सीएमएसआई कुनुस्तोरिया शाखा के सहयोग से इस रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया . 


  इस रक्तदान शिविर के आयोजन में अतिथि के रुप में उपस्थित मनोज दत्ता ने कहा कि वह ज्योति बसु ही थे जिन्होंने बंगाल में सांप्रदायिकता के प्रसार को रोका, जब भी कहीं दंगे हुए वह खुद घटनास्थल पर पहुंचते थे और पुलिस को बिना किसी भेदभाव के बिना यह देखें कि दंगा करने वाले किस राजनीतिक दल से संबंधित हैं. उनको गिरफ्तार करने का आदेश दिया करते थे ,उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था तभी ज्योति बसु ने यहां कोई दंगा होने नहीं दिया उससे पहले भी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भी पूरे बंगाल में शांति कायम रही. उन्होंने कहा कि जब 1992 में अयोध्या में कारसेवक इकट्ठा हो रहे थे तब ज्योति बसु रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को कहा था कि उत्तर प्रदेश के कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त करें और वहां शांति कायम करवाएं वह ऐसा बोल सकते थे क्योंकि ज्योति बसु में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के प्रति जो लगाव था वह अभूतपूर्व था . 


 इस रक्तदान शिविर के दौरान जामुड़िया के पूर्व विधायक जहानारा खान, गौरंगो चटर्जी, सुकुमार सांगई, कुंतल चटर्जी ,कलीमुद्दीन अंसारी, अजीत कोड़ा नासिर मियां शंभू चौधरी राधेश्याम हरिजन हीरेन मंडल के अलावा बड़ी संख्या में सीटू और डीवाईएफआई के समर्थक उपस्थित थे.