आसनसोल : काजी नजरुल विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के छात्र छात्राएं ऑनलाइन परीक्षा के मांग पर पिछले एक पखवाड़े से आंदोलनरत हैं। शुक्रवार की सुबह यह आंदोलन ने अलग रूप अख्तियार कर लिया। एक छात्र अपनी मांग के समर्थन में आत्महत्या की प्रयास की। वही एक छात्रा बेहोश हो गई। दिन भर हंगामा चलता रहा। शुक्रवार की शाम जब विश्वविद्यालय के कुलपति नहीं आए। तो आक्रोशित छात्रों ने अपनी मांग के समर्थन में शाम 5 बजे से भूख हड़ताल पर बैठ गए। छात्रों का आरोप है कि रात में आसनसोल थाना पुलिस आई और लाइट ऑफ करके उन लोगों के ऊपर लाठीचार्ज किया। जिसमें 3 छात्र छात्राएं घायल हो गए। उन्हें आसनसोल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनका आरोप था कि पुरुष पुलिस छात्राओं को भी नहीं बख़्शा। उन्हें जबरन धकेला गया। उन पर लाठियां बरसाई गईं। एक घायल छात्र बिपुल ने बताया कि वे लोग शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस आई और ऊपर गई। इसके बाद पुलिस ने कहा कि ऊपर तल्ले में आग लग गई है। इसकी खबर सुनकर जब छात्र ऊपर तल्ले दौडृ पड़े है तो पुलिस ने छात्रों पर लाइट ऑफ करने के आरोप लगाते हुए लाठीचार्ज कर दी। जिसमें तीन छात्र छात्राएं घायल हो गए। किसी के हाथ में, किसी के पैर में तो किसी के माथे पर चोट लगी है। यही नहीं छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस के जवान छात्र छात्राओं को अश्लील गालियां भी दी। घटना की खबर पाकर अन्य उच्च अधिकारी केएनयू के परिसर में पहुंचे। तो छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और पुलिस से लाठी चार्ज करने और आग लगने की झूठी खबर फैलाने को लेकर विरोध करते रहे। हालांकी रात भर हंगामा चलने के बावजूद भी आंदोलनकारी छात्र छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर से बाहर नहीं गए और अपने आंदोलन पर डटे रहे। शनिवार की सुबह भी वे लो भूख हड़ताल पर बैठे रहे। इस दौरान विधान चंद्र कॉलेज कॉमर्स के छात्र ने बिक्रम दे ने बताया कि पढ़ाई केवल 1 माह ऑनलाइन पढ़ाई गई है। 1 माह ऑफलाइन। सभी जानते हैं। यहां नगर निगम और लोकसभा चुनाव के कारण कॉलेजों में छुट्टी दे दी गई थी। छह माह की पढ़ाई 2 माह में कैसे पूरीलहोगी। इसलिए हम लोग ऑनलाइन परीक्षा की मांग कर रहे हैं। जबकि पश्चिम बंगाल के बहुसंख्यक विश्वविद्यालय ऑनलाइन परीक्षा की मंजूरी दे दी है। बांकुड़ा, पुरूलिया, कल्याणी विद्यासागर समेत कई विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन परीक्षा हो रही है लेकिन काजी नजरुल विश्वविद्यालय के कुलपति 2 दिन पहले छात्रों के आंदोलन को देखते हुए उन्होंने कहा कि यहां भी ऑनलाइन परीक्षा होगी। इस को लेकर वे शिक्षा मंत्री से वार्ता करेंगे। कुलपति के इस आश्वासन के बाद सभी छात्र आंदोलन को समाप्त कर खुशी-खुशी घर घर गए। लेकिन दूसरे दिन सुबह ही कुलपति ने एक लिंक भेजा। जिसमें वे फिर अपने वादे से मुकरते हुए ऑफलाइन परीक्षा कराने की नोटिस दे दी। इससे आक्रोशित होकर शुक्रवार को छात्र छात्राओं ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया जिसमें पुलिस ने छात्राओं को पर लाठीचार्ज कर दी हम लोग गुंडा नहीं हैं छात्र हैं हम अपनी मांग को के समर्थन में शांतिपूर्वक ढंग से आंदोलन कर रहे हैं हमारी मांग है कि कुलपति यहां आए और अपने मुख से यह घोषणा करें कि काजी नजरुल विश्वविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षा ली जाएगी। इस मामले में वे किसी का भी सुनना नहीं चाहते हैं।
वहीं दूसरी ओर काजी नजरूल विश्वविद्यालय के छात्रों पर लाठीचार्ज के आरोप को डीजीपी ने प्रेस नोट के माध्यम से खंडन
किया। काजी नजरूल विश्वविद्यालय के छात्रों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि 20 मई की रात जब वे लोग आंदोलन कर रहे थे। तो पुलिस ने बिजली आपूर्ति बंद कर उन लोगों पर लाठीचार्ज किया है। इस आरोप को खंडन करने के लिए आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी ने शनिवार एक प्रेस नोट जारी किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि ऑनलाइन परीक्षा के मांग पर 20 मई को काजी नज़रुल विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं सुबह 10 बजे कॉलेज परिसर में इकट्ठा हो गए। इनकी संख्या लगभग ढाई सौ के लगभग थी। इसकी सूचना आसनसोल उत्तर थाना पुलिस को मिली। पुलिस 11 बजे के लगभग विश्वविद्यालय पहुंची। वहां छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपना प्रदर्शन कर रहे थे। इसी बीच शाम 5 बजे के लगभग छात्र कॉलेज परिसर के अंदर कार्यालय आने जाने वाले रास्ते में बैठ गए और रास्ता को जाम कर दिया। इस दौरान विश्वविद्यालय के 17 कर्मचारी अपने कार्यालय के अंदर थे। उन्हें भी लोग बाहर आने नहीं दे रहे थे। तो इसकी जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति सोहन चक्रवर्ती ने फोन पर आसनसोल उत्तर थाना प्रभारी को दी। उन्होंने थाना प्रभारी से यह अपील किया कि विश्वविद्यालय के 17 कर्मचारी अपने कार्यालय के अंदर फंसे हुए हैं। छात्र उन्हें बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। उनकी रक्षा की जाए और सुरक्षा के साथ उन्हें बाहर निकाली जाए।फिर कॉलेज के रजिस्टर डॉ देवाशीष सरकार ने व्हाट्सएप के माध्यम से थाना प्रभारी को मैसेज भेजा। इसके बाद 8:00 बजे के लगभग आसनसोल थाना प्रभारी विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और छात्रों से कर्मचारियों को बाहर जाने देने की अपील की। लेकिन किसी भी सूरत में छात्र मानने के लिए तैयार नहीं थे। 2 घंटे मान मनव्व ल करने के बाद अचानक दूसरे और तीसरे तल से कुछ धुंआ दिखने लगा।धुंआ उठता देखकर लगा आग लग गई है। इस दौरान बिजली भी गुम हो गई। कोई दुर्घटना की आशंका ना हो इसलिए पुलिस ने सभी को कार्यालय भवन से बाहर निकाला और कर्मचारियों को बाहर निकालने का रास्ता बनाया। इसके बावजूद भी एक छात्र ने अपना वीडियो वायरल किया कि उसके हाथ में चोट लगी है। पुलिस के लाठी से उसकी उंगली फट गई है और खून गिर रहा है। लेकिन पुलिस पर लगाई गई। यह आरोप सरासर बेबुनियाद है। क्योंकि पुलिस का कोई भी अधिकारी या जवान लाठी लेकर विश्वविद्यालय परिसर में नहीं गए थे। जब लाठी गया ही नहीं था। तो लाठीचार्ज की बात बेबुनियाद है।प्रेस नोट में लिखा गया है कि यह प्रेस नोट पुलिस की पक्ष रखती है।

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