रानीगंज : रानीगंज शहर में एक समय छोटे बच्चों के लिए खेलने का मैदान ना होने की वजह से काफी परेशानी होती थी. इसी को ध्यान में रखते हुए 2000 वर्ष में शिशु उद्यान रानीगंज के हाटतल्ला से हटा कर रानीगंज का प्राण केंद्र कहे जाने वाले सोष्टीगोड़िया में बनाया गया था. इस दौरान सांसद रहे वंश गोपाल चौधरी की मदद से 10 बीघा जमीन पर शिशु उद्यान को बनाया गया था. 3 मार्च 2020 को तत्कालीन मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने शिशु उद्यान पार्क की नींव रखी. देखते ही देखते 17 अक्टूबर 2001 यानी मात्र 19 महीने में बच्चों के खेलने के लिए शिशु उद्यान तैयार हो गया. पार्क के चारों तरफ पाम ट्री लगाने के साथ ही बच्चों के खेलने के लिए विभिन्न तरह के उपकरण लगाए गए. पार्क के एक तरफ पशु पक्षियों को रखने की व्यवस्था की गई.एक तरफ से मिनी चिड़ियाखाना भी कहा जा सकता है. वहीं पार्क के दूसरी तरफ खाना प्रेमियों के लिए कैंटीन की व्यवस्था की गई थी, और सबसे ज्यादा खूबसूरत है तो पार्क के बीचो- बीच बना फव्वारा है. आसनसोल नगर निगम द्वारा परिचालित सोष्टिगोड़िया पार्क रानीगंज में काफी प्रचलित है ,यहां शूटिंग के लिए बैलून फोड़ने का स्टॉल लगाया गया थे. पार्क के सौंदर्यीकरण को बढ़ाने के लिए सोष्टीगोड़िया जलाशय में कुछ राजहंस भी छोड़े गए थे, लेकिन वर्तमान समय में यह शिशु उद्यान पार्क सिर्फ नाम भर रह गया है. यहां किशोर किशोरियों और प्रेमी प्रेमिकाओं का अड्डा हो चुका है. इतना ही नहीं सोष्टीगोड़िया शिशु उद्यान का नाम बदलकर कवि सुकांतो भट्टाचार्य के नाम पर सुकांतो शिशु उद्यान रख दिया गया है. कवि सुकांतो भट्टाचार्य के जीवन के विभिन्न यादगार पलों को लोगों के सामने लाने के लिए 2003 साल में पार्क के ठीक सामने सुकांतो आर्ट गैलरी के लिए हॉल का निर्माण किया गया. पार्क निर्माण करने का जो मुख्य उद्देश्य था वह वर्तमान समय में लगभग खत्म हो चुका है. आसनसोल नगर निगम की तरफ से इस पार्क के सौंदर्यीकरण की जो जिम्मेदारी उठाई गई थी,वह अब बिल्कुल खत्म हो चुकी है, इस पार्क में अब ना तो कैंटीन ही सही ढंग का है ना ही पशु पक्षी को रखने के घर की मरम्मत की गई है, जलाशय भी बेहाल अवस्था में पड़ा हुआ है जिस में गंदगी का अंबार लगा है. तत्कालीन समय में इस जलाशय में तैराक प्रतियोगिता करवाई जाती थी, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लगती थी पर अब यह बिल्कुल समाप्त हो चुका है. कार के विभिन्न हिस्सों में लगे फव्वारे भी बंद हो चुके हैं। पार्क के अंदर बनाए गए महिला और पुरुष शौचालय बेहाल अवस्था में है. सोष्टीगोडिया शिशु उद्यान पार्क का नाम बदलकर कवि सुकांतो के नाम पर तो रख दिया गया पर ना तो कवि के नाम की लाज रखी जा रही है और ना ही बच्चों के खेलने की व्यवस्था की गई है. रानीगंज के लोग इस पार्क के जीर्णोद्धार के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं. सुकान्त शिशु उद्यान के इस अवस्था को लेकर रानीगंज बोरो के इंजीनियर इंद्रजीत कोनार का कहना है कि पार्क की नियमित रूप से सफाई की जाती है एवं लोग इस पार्क में मॉर्निंग वॉक करने आते हैं .आंधी तूफान की वजह से कभी कभार पार्क गंदी हो जाती है. उनका कहना है की अगर किसी प्रकार की समस्या है तो उसका समाधान की जाएगी .अब देखना है कि वर्तमान सरकार रानीगंज के इस पार्क को पहले की तरह जीर्णोद्धार कर रानीगंज की खूबसूरती बढ़ाते हैं या यह पार्क वैसे ही बदहाल अवस्था में बना रहता है.




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