जामुड़िया, 14 अगस्त 2026। आमतौर पर बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन जामुड़िया नामोपाड़ा प्राथमिक विद्यालय के नन्हे विद्यार्थियों ने शुक्रवार को एक अलग भूमिका निभाई। किताबों में सीखी बातों को लेकर वे सीधे आदिवासी बस्ती में पहुंचे और लोगों को जनगणना 2027 के प्रति जागरूक किया। माझी, कोड़ा, टुडू, बाउरी सहित विभिन्न वंचित समुदायों के परिवारों से संवाद करते हुए बच्चों ने जनगणना के महत्व, सही जानकारी देने और गणनाकर्मियों के साथ सहयोग करने का संदेश दिया।
इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि बच्चे केवल स्वयं जागरूक होने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए जागरूकता के दूत बन गए। उन्होंने माता-पिता, दादा-दादी और अन्य बुजुर्गों को समझाया कि जनगणना केवल लोगों की संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं है। देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, लोगों की जीवन-परिस्थितियों तथा भविष्य की योजनाओं के लिए आवश्यक आंकड़े जुटाने में जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
बस्ती में लोगों से बातचीत करते हुए विद्यार्थियों ने अपील की कि गणनाकर्मी जब उनके घर पहुंचें तो उनके साथ पूरा सहयोग करें और परिवार के सदस्यों से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराएं। बच्चों ने स्व-गणना (Self-Enumeration) के बारे में भी लोगों को सरल भाषा में जानकारी दी।
नन्हे विद्यार्थियों की सहज भाषा और आत्मविश्वास से भरी बातचीत ने बस्ती के लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जहां सामान्यतः बच्चे बड़ों से सीखते हैं, वहीं इस दिन वे स्वयं अपने परिवार और समुदाय के लिए ‘छोटे शिक्षक’ की भूमिका में नजर आए। इस पहल ने स्कूल और समाज के बीच शिक्षा का एक जीवंत सेतु भी तैयार किया।
जनगणना जागरूकता के साथ इस अभियान में देशभक्ति का रंग भी देखने को मिला। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विद्यार्थियों ने आदिवासी बस्ती के लोगों के बीच सौ से अधिक राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए। नन्हे हाथों से बुजुर्गों के हाथों तक तिरंगा पहुंचने का दृश्य बेहद भावुक रहा। कई बुजुर्गों ने बच्चों से राष्ट्रीय ध्वज प्राप्त कर खुशी और गर्व व्यक्त किया।
विद्यालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें परिवार, समुदाय और समाज से जोड़ना है। कक्षा में सीखी जानकारी को वास्तविक जीवन में लागू करने का यह प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की व्यावहारिक एवं अनुभव-आधारित शिक्षा की भावना से जुड़ा हुआ है। विद्यालय का मानना है कि ऐसी गतिविधियां बच्चों में सामाजिक संवेदनशीलता, नागरिक जिम्मेदारी और देश के प्रति जुड़ाव की भावना विकसित करती हैं।
इस अभियान में विद्यालय के प्रधान शिक्षक दीप नारायण नायक के साथ शिक्षक शुभदीप सरकार, बलराम दे और ज्योतिष रुईदास सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। शिक्षकों ने बच्चों को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने में भी सहयोग किया।
पश्चिम बर्धमान के जिलाधिकारी ने कहा, “छोटे विद्यार्थियों के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों तक जनगणना के प्रति जागरूकता का संदेश पहुंचाना अत्यंत सराहनीय पहल है। सही जानकारी देना और जनगणना प्रक्रिया में सहयोग करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।”
प्रधान शिक्षक दीप नारायण नायक ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे केवल स्वयं सीखने वाले विद्यार्थी न रहें, बल्कि अपने सीखने को परिवार और समाज तक पहुंचाने वाले जागरूक नागरिक भी बनें। शिक्षा की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज तक पहुंचे।”
आदिवासी छात्रा दिशा कोड़ा ने कहा, “हमने स्कूल में सीखा है कि जनगणना क्यों महत्वपूर्ण है। इसलिए हम अपने माता-पिता और दादा-दादी को भी बताएंगे कि गणनाकर्मी घर आएं तो उन्हें सही जानकारी देकर सहयोग करना चाहिए।”
वहीं, आदिवासी समुदाय की बुजुर्ग महिला ज्योत्स्ना टुडू ने कहा, “आज मेरी नातिन ने मेरे हाथ में देश का तिरंगा दिया और जनगणना के बारे में भी समझाया। बच्चों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।”
नन्हे विद्यार्थियों की इस पहल ने आदिवासी बस्ती में एक साथ जनगणना, नागरिक जिम्मेदारी और देशभक्ति का संदेश पहुंचाया। स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकलकर बच्चों द्वारा समाज के बीच निभाई गई यह भूमिका शिक्षा को जनभागीदारी से जोड़ने की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई।


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