रानीगंज-ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा तिराट कोलियरी क्षेत्र में खदान बंद होने का हवाला देकर आवास खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है. इस फैसले के विरोध में तिराट कोलियरी काली मंदिर परिसर में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई, जहाँ लोगों ने ईसीएल प्रबंधन के खिलाफ सामूहिक हस्ताक्षर अभियान चलाया.यह ज्ञापन जल्द ही प्रबंधन और स्थानीय विधायक अग्निमित्रा पाल को सौंपा जाएगा.
पीढ़ियों से रह रहे लोग आखिर कहाँ जाएँगे?
प्रदर्शनकारियों पायल लायक, नबान्न धीवर और जयंत बाउरी ने बताया कि वे लगभग 40 वर्ष से इन ईसीएल क्वार्टर में रह रहे हैं. ईसीएल ने अचानक बिजली आपूर्ति काटकर घर खाली करने का नोटिस थमा दिया है. निवासियों का कहना है कि उनके पास इतनी पूंजी नहीं है कि वे नया घर बना सकें अचानक बेघर होने से बच्चों की पढ़ाई और आगामी माध्यमिक परीक्षाएं प्रभावित होंगी. प्रभावितों ने साफ शब्दों में कहा, "पहले सरकार हमारे पुनर्वास की व्यवस्था करे, उसके बाद ही हम घर खाली करेंगे.
चुनावी वादों और सत्ता परिवर्तन पर फूटा गुस्सा
सभा में मौजूद महिलाओं और भाजपा नेता अनिंद्य आचार्य ने केंद्र व राज्य की राजनीतिक स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई.प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनाव से पहले भाजपा द्वारा वादा किया गया था कि घर बनाने के लिए ₹3 लाख दिए जाएंगे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें उजाड़ा जा रहा है.निवासियों ने सरकार से सहानुभूतिपूर्वक इंसाफ की गुहार लगाई है.
ईसीएल प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नेता जयंत बाउरी ने स्पष्ट किया कि केंद्र में भले ही भाजपा की सरकार हो, लेकिन यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि ईसीएल प्रबंधन की असंवेदनशील नीतियों के खिलाफ है.निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना पुनर्वास के उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की गई, तो क्षेत्र में एक व्यापक और उग्र जन आंदोलन शुरू किया जाएगा.



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