बनगांव: उत्तर २४ परगना जिले के बनगांव से भ्रष्टाचार और जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है। बनगांव के छहघरिया ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान और वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बनगांव संगठनात्मक जिला के उपाध्यक्ष प्रसनजीत घोष और उनकी पत्नी व पूर्व प्रधान उमा दास घोष को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर जाली अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने और प्रधान का पद हथियाने का गंभीर आरोप है।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद बनगांव और आस-पास के राजनीतिक गलियारों में भारी हड़कंप मच गया है। विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल पर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
स्थानीय और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, छहघरिया ग्राम पंचायत की सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी। आरोप है कि प्रसनजीत घोष ने अपनी पत्नी उमा दास घोष को चुनाव लड़वाने और प्रधान बनाने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर एक फर्जी एससी (SC) सर्टिफिकेट बनवाया। इसी जाली प्रमाण पत्र के आधार पर उमा दास घोष ने न केवल चुनाव लड़ा, बल्कि वे छहघरिया पंचायत की प्रधान भी चुनी गईं।
जांच में खुली पोल, पुलिस ने की कार्रवाई
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद लंबे समय से विभागीय जांच चल रही थी। जांच में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि उमा दास घोष का एससी सर्टिफिकेट पूरी तरह से फर्जी (জাল) था।
ठोस सबूत मिलने के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए शनिवार को पूर्व प्रधान प्रसनजीत घोष और उनकी पत्नी उमा दास घोष को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की तैयारी कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस जाली सर्टिफिकेट को बनाने में सरकारी विभाग के किन-किन अधिकारियों या दलालों की मिलीभगत थी।

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