कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के रुझानों के बीच कोलकाता का कालीघाट क्षेत्र छावनी में तब्दील हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास और आसपास के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा की कमान अब पूरी तरह से केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Forces) ने संभाल ली है। सुरक्षा के इस कड़े घेरे का उद्देश्य किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा (Three-Tier Security)
प्रशासन ने कालीघाट और हरीश चटर्जी स्ट्रीट की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों को सील कर दिया है:
सशस्त्र जवानों की तैनाती: कालीघाट रोड और हरीश मुखर्जी रोड के मिलन स्थल पर स्थित 'जय हिंद भवन' और अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों के बाहर केंद्रीय बलों के हथियारबंद जवान मुस्तैद हैं।
बैरिकेडिंग: पूरे इलाके को मजबूत बैरिकेडिंग से घेर लिया गया है। हर आने-जाने वाले व्यक्ति की गहन तलाशी ली जा रही है।
कोलकाता पुलिस के साथ समन्वय: केंद्रीय बल और कोलकाता पुलिस के जवान संयुक्त रूप से इलाके में गश्त कर रहे हैं ताकि विजय जुलूसों या भीड़ के कारण कोई तनाव उत्पन्न न हो।
क्यों है यहाँ इतनी सुरक्षा?
कालीघाट न केवल मुख्यमंत्री का निवास स्थान है, बल्कि यह तृणमूल कांग्रेस की रणनीति का मुख्य केंद्र भी है।
रुझानों का असर: राज्य भर से आ रहे चुनावी रुझानों के बाद समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ यहाँ जमा होने की संभावना है।
तनाव की आशंका: कुछ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और टीएमसी के बीच चल रही कांटे की टक्कर को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार के राजनीतिक टकराव को लेकर 'हाई अलर्ट' पर हैं।
वर्तमान स्थिति
कालीघाट थाना क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जाएगी। ड्रोन के जरिए भी भीड़ की निगरानी की जा रही है। कालीघाट मंदिर और आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को कम से कम आवाजाही करने की सलाह दी गई है।
अब सबकी निगाहें कालीघाट के उस गलियारे पर टिकी हैं, जहाँ से बंगाल की अगली सरकार की दिशा तय होगी।

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