दक्षिण २४ परगना: सोनारपुर में भारी विरोध के बीच घिरे अभिषेक बनर्जी, फेंके गए अंडे व जूते; लगे 'चोर-चोर' के नारे



सोनারपुर (दक्षिण २४ परगना), ३० मई: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पहली बार राजनीतिक कार्यक्रम के तहत जमीन पर उतरे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को शनिवार को दक्षिण २४ परगना के सोनारपुर में अभूतपूर्व विरोध का सामना करना पड़ा। चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए टीएमसी कार्यकर्ता संजू कर्माकर और अन्य प्रभावित परिवारों से मिलने जा रहे अभिषेक बनर्जी के काफिले पर प्रदर्शनकारियों ने जोरदार हमला बोल दिया।

इस दौरान उग्र भीड़ ने उन्हें घेरकर 'चोर-चोर' और 'गो बैक' के नारे लगाए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि टीएमसी सांसद पर अंडे और जूते तक फेंके गए, जिसके चलते उन्हें खुद को बचाने के लिए सिर पर क्रिकेट हेलमेट पहनना पड़ा।



चार पहिया गाड़ी छोड़ बाइक पर सवार हुए, फिर भी हुआ हमला

कोलकाता के बेलेघाटा का दौरा करने और कालीघाट स्थित आवास पर सीआईडी (CID) का नोटिस लेने के बाद अभिषेक बनर्जी दक्षिण २४ परगना के सोनারपुर के लिए रवाना हुए थे। पाटुली के निकट ढलाई ब्रिज से लेकर सोनারपुर के कामराबाद तक भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने काले झंडे लेकर उनका रास्ता रोक रखा था।

हेलमेट का सहारा: भारी विरोध और रास्तों पर जाम को देखते हुए अभिषेक बनर्जी चार पहिया गाड़ी से उतरकर मोटरसाइकिल (बाइक) पर सवार हो गए।



धक्का-मुक्की और कपड़े फटे: जैसे ही वे बाइक से सोनারपुर के भीतर दाखिल होने लगे, प्रदर्शनकारियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने उन पर सीधे हाथ उठाने की कोशिश की, जिससे उनके शर्ट के बटन टूट गए।

अंडे और जूतों की बौछार: इसी आपाधापी के बीच भीड़ की तरफ से लगातार अंडे और जूते फेंके जाने लगे। खुद को सुरक्षित रखने के लिए अभिषेक बनर्जी ने सिर पर क्रिकेट हेलमेट लगा लिया और उसी हालत में पैदल ही आगे बढ़े।


"यह मुझे जान से मारने की भाजपा की साजिश है" : अभिषेक बनर्जी

इस हिंसक विरोध और हमले के बाद बेहद व्यथित और उग्र दिखे अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए इस पूरे घटनाक्रम के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया।


उन्होंने फटी हुई शर्ट दिखाते हुए कहा, "यह पूरी तरह से भाजपा द्वारा प्रायोजित हमला है। देखिए उन्होंने मेरे साथ क्या किया है। यह लोकतंत्र का उनका उदाहरण है। चुनाव नतीजों को अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और जमीन पर पुलिस कहीं दिखाई नहीं दे रही है। वे मुझे जान से मारना चाहते थे। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हुई है। मैं निश्चित रूप से इस मामले को लेकर हाईकोर्ट और माननीय राज्यपाल के पास जाऊंगा और कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।"


सियासी तनाव चरम पर

टीएमसी के शीर्ष नेता पर हुए इस तरह के जमीनी हमले ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी और तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। जहां तृणमूल कांग्रेस ने इसे अपनी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता की सुरक्षा में बड़ी चूक और राजनीतिक प्रतिशोध की पराकाष्ठा बताया है, वहीं विपक्षी खेमे का कहना है कि यह चुनावी नतीजों के बाद जनता का स्वतःस्फूर्त आक्रोश है। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सोनारपुर और आस-पास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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