आसनसोल: आसनसोल इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित स्ट्रांग रूम परिसर में रविवार को उस समय भारी तनाव फैल गया, जब चुनाव ड्यूटी में लगी एक गाड़ी की तलाशी के दौरान सीलबंद लिफाफे से एक स्विच ऑफ मोबाइल फोन बरामद हुआ। इस घटना के बाद वहां मौजूद विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने जमकर हंगामा किया और चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
चेकिंग के दौरान हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, रविवार को रानीगंज विधानसभा केंद्र (नंबर 278) का स्टीकर लगी एक गाड़ी जब स्ट्रांग रूम परिसर के अंदर प्रवेश कर रही थी, तभी वहां तैनात विभिन्न राजनीतिक दलों के एजेंटों और प्रतिनिधियों को संदेह हुआ। उन्होंने गाड़ी को रोककर उसकी तलाशी लेने की मांग की। तलाशी के दौरान गाड़ी के अंदर से एक सीलबंद लिफाफा मिला।
जब राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लिफाफे को खोला गया, तो उसमें रानीगंज विधानसभा से जुड़े कुछ दस्तावेजों के साथ एक स्विच ऑफ मोबाइल फोन पाया गया। स्ट्रांग रूम जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र में मोबाइल मिलने की खबर फैलते ही परिसर में हड़कंप मच गया।
अधिकारी के पास नहीं था कोई जवाब
गाड़ी में मौजूद अधिकारी ने स्वयं को 'इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभारी' बताया। जब उनसे यह पूछा गया कि सीलबंद लिफाफे के भीतर मोबाइल फोन कैसे आया और वह स्ट्रांग रूम के अंदर इसे क्यों ले जा रहे थे, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने बस इतना कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि लिफाफे के अंदर मोबाइल रखा हुआ है। अधिकारी की इस अनभिज्ञता ने राजनीतिक दलों के संदेह को और गहरा कर दिया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग से शिकायत की तैयारी
घटना के बाद मौके पर मौजूद भाजपा, वामपंथी और अन्य दलों के प्रतिनिधियों ने सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।
राजनीतिक दलों का रुख: प्रतिनिधियों का कहना है कि स्ट्रांग रूम के भीतर किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना वर्जित है, ऐसे में सीलबंद लिफाफे में छिपाकर मोबाइल ले जाना एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
अगला कदम: सभी राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर इस मामले की लिखित शिकायत चुनाव आयोग से करने की बात कही है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और इस बात की जांच हो कि यह चूक थी या सोची-समझी साजिश।
"यह सुरक्षा में एक बड़ी सेंध है। अगर हम सतर्क नहीं होते, तो यह मोबाइल अंदर चला जाता। हम इस मामले को छोड़ेंगे नहीं और चुनाव आयोग से उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे।"
— मौके पर मौजूद एक राजनीतिक प्रतिनिधि
फिलहाल प्रशासन इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन इस घटना ने आसनसोल में चुनावी सरगर्मी और तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

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