कोलकाता, 3 मई: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी एसी-वाइज काउंटिंग प्रस्ताव के अनुसार, राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना की विस्तृत योजना तैयार कर ली गई है।
उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों से लेकर जंगलमहल, औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर कोलकाता महानगर तक—हर सीट के लिए अलग-अलग काउंटिंग सेंटर, स्ट्रॉन्ग रूम, काउंटिंग हॉल और टेबल निर्धारित किए गए हैं।
आयोग के दस्तावेज के मुताबिक, पूरे राज्य में कुल 459 काउंटिंग हॉल का उपयोग किया जाएगा। ईवीएम मतगणना के लिए 4,800 टेबल लगाए जाएंगे। वहीं डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) और ईटीबीपीएस वोटों की गिनती के लिए अलग से 322 हॉल और 1,687 टेबल तय किए गए हैं। इससे साफ है कि मतगणना को तेज, सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
जिला-वार सूची के अनुसार, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम, पूर्व और पश्चिम बर्धमान, बीरभूम और कोलकाता के सभी विधानसभा क्षेत्रों के लिए अलग-अलग काउंटिंग सेंटर तय किए गए हैं।
कई जिलों में एक ही केंद्र पर एक से अधिक सीटों की मतगणना होगी, लेकिन अलग-अलग हॉल और टेबल पर यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बड़े शहरों और घनी आबादी वाले इलाकों में कॉलेज, पॉलिटेक्निक, स्कूल और प्रशासनिक भवनों को काउंटिंग सेंटर बनाया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से महाविद्यालय और उच्च विद्यालयों का उपयोग किया जाएगा।
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, मतगणना के दिन सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। हर केंद्र पर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा, केंद्रीय बलों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और उम्मीदवारों के एजेंटों की मौजूदगी में चरणबद्ध तरीके से गिनती होगी। स्ट्रॉन्ग रूम खोलने से लेकर हर राउंड के परिणाम की घोषणा तक कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार का चुनाव बेहद कड़ा मुकाबले वाला रहा है। ऐसे में 294 सीटों की मतगणना अब पूरे राज्य के लिए सबसे अहम राजनीतिक क्षण बन गई है। किस जिले में किसका दबदबा रहेगा, कहां समीकरण बदलेंगे और कहां कांटे की टक्कर होगी—इन सभी सवालों के जवाब अब मतगणना केंद्रों से ही सामने आएंगे।
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग की यह विस्तृत योजना यह दर्शाती है कि पश्चिम बंगाल में मतगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष, सुचारू और तेज बनाने के लिए इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। अब सबकी नजरें कल सुबह से शुरू होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।

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