रानीगंज: पर्यावरण सुरक्षा और स्वस्थ जीवन की मांग को लेकर रानीगंज के कुनुस्तुरिया क्षेत्र अंतर्गत बाँसड़ा कोलियरी में शुक्रवार को आदिवासियों का भारी जनाक्रोश देखने को मिला. ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) द्वारा प्रस्तावित 'कंटीन्यूअस माइनिंग' और खुली खदान (ओपन कास्ट माइन) के विरोध में आदिवासी समुदाय बाँसड़ा आतु सोलह आना ने तीसरे चरण का आंदोलन करते हुए कोलियरी एजेंट कार्यालय का घंटों घेराव किया.
पारंपरिक हथियारों के साथ जुटे हजारों ग्रामीण
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे से ही बाँसड़ा गाँव के सैकड़ो आदिवासी पुरुष और महिलाएँ पारंपरिक हथियारों तीर-धनुष, कुल्हाड़ी, लाठी और झाड़ू के साथ जुटना शुरू हो गए थे. दोपहर 2 बजे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ईसीएल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.एजेंट की अनुपस्थिति में ग्रामीणों ने कोलियरी मैनेजर को घेरकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं.
बीमारी और प्रदूषण का सता रहा है डर
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेता संजय हेंब्रम ने कहा, ईसीएल यहाँ कंटीन्यूअस माइनिंग शुरू करना चाहता है, जिससे पूरे इलाके में कोयले की धूल (कोल डस्ट) फैलेगी. इससे ग्रामीणों में सिलिकोसिस जैसी घातक बीमारियाँ फैलने का खतरा है. हम किसी भी कीमत पर अपने जल, जंगल और जमीन को बर्बाद नहीं होने देंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने पहले काम रोकने का आश्वासन दिया था, लेकिन चोरी-छिपे प्रोजेक्ट पर काम जारी है.
प्रबंधन को 7 दिनों का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने ईसीएल के उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की. रामचंद्र हेंब्रम, मंगल हेंब्रम और प्रदीप बास्की सहित अन्य ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह बंद नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा और व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा.
प्रबंधन का पक्ष
इस संबंध में बाँसड़ा कोलियरी के मैनेजर ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराते हुए कहा कि इस परियोजना पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय स्तर पर नहीं है.उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट ईसीएल के उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी.



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