कोलकाता, पीबी टीवी : पश्चिम बंगाल में राज्यपाल की नियुक्ति और हालिया प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर राय और सत्ता पक्ष के नेताओं ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए मौजूदा स्थिति को 'ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन' से भी बदतर करार दिया है। सुखेंदु शेखर राय ने आरोप लगाया कि राज्यपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया गया है।
उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
पैनल और परामर्श का अभाव: नियमतः राज्यपाल की नियुक्ति से पहले राज्य सरकार को पैनल में रखा जाना चाहिए और मुख्यमंत्री से चर्चा अनिवार्य है, लेकिन यहाँ चर्चा तो दूर, जानकारी तक नहीं दी गई।पूर्व राज्यपाल की अनभिज्ञता: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पूर्व राज्यपाल को भी अपने जाने की खबर नहीं थी, अन्यथा उन्होंने इस राज्य की मतदाता सूची में अपना नाम क्यों दर्ज कराया होता?राजनीतिक नियुक्ति: चुनाव आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी राजनीतिक व्यक्ति को इस पद पर नहीं लाया जाना चाहिए, फिर भी 'जय श्री राम' के नारे लगाने वालों को नियुक्त किया जा रहा है।हिंसा और चुनाव का जिक्रनेताओं ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वे जनसमर्थन के जरिए बंगाल पर कब्जा नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए 'बायपास सर्जरी' (पीछे के दरवाजे) से सत्ता हथियाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 172 बंगालियों की हत्या की गई है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा।'डबल इंजन' सरकार पर कटाक्षउत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा बंगाल के मनीषियों के नाम का गलत उच्चारण करने और 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के दावों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी गई।सांस्कृतिक अज्ञानता: सुखেন্দু शेखर राय ने कहा, "डबल इंजन सरकार के लोग मूर्ख हैं। उन्हें यह तक नहीं पता कि गीत के 150 साल हैं या कुछ और।"भ्रष्टाचार के आरोप: उन्होंने असम से लेकर बंगाल तक उन नेताओं पर निशाना साधा जिन्हें कथित तौर पर पैसे के साथ देखा गया था, फिर भी उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं।मतदाता सूची का मुद्दाहाल ही में 6 लाख नामों के निपटारे (वोटर लिस्ट से नाम हटने या सुधार) को लेकर भी राज्य सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसे लेकर प्रशासनिक हलकों में गहमागहमी तेज है।


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